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समय की कमी से जूझते युवा वर्किग कपल्स

नए दौर में लगभग हर व्यक्ति का आम डायलॉग हो गया है कि उसके पास समय नहीं है। यह समय की कमी युवा वर्किग कपल्स की सेक्स लाइफ को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसके दुष्परिणाम रिश्तों में उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा हैं। जॉब जब शिफ्ट वाली हो, तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। शिफ्ट जॉब वालों की सेक्स लाइफ की उलझनों पर एक नजर। एक सर्वे के अनुसार युवा वर्किग कपल्स लगभग 120 दिनों में एक बार सेक्स कर पाते हैं, जबकि साधारण जोड़े हर दूसरे दिन सेक्स संबंध बनाते हैं। यह आंकड़ा चौंकाने से ज्यादा चेताने वाला है, क्योंकि भारत में वर्किग कपल्स की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है। लड़का और लड़की वाकई कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं और करियर दोनों की ही वरीयता सूची में सबसे ऊपर आ चुका है। इस ट्रेंड के दुष्परिणाम अभी अपने शुरुआती दौर में हैं। इनका असर अभी उतना नहीं दिख रहा, जितना आने वाले वर्षो में दिखेगा।

वर्किग कपल्स में भी यह समस्या सबसे ज्यादा उन जोड़ों में आती है जो शिफ्ट जॉब्स करते हैं। समय की कमी शिफ्ट जॉब्स वालों की सबसे बड़ी समस्या होती है समय का सामंजस्य। जब एक पार्टनर के ऑफिस जाने का वक्त होता है तो दूसरा घर में कदम रख रहा होता है। ऐसे ही एक  ऐसी स्थिति शिफ्ट जॉब में काम करने वाले वर्किग कपल्स के बीच आम होती है।जिनके पास एक-दूसरे से ठीक से मिलने का समय भी नहीं होता। सेक्स तो बहुत दूर की बात है। देखा जाता है कि शादी के शुरू के वर्षो में कपल्स एक-दूसरे के लिए करियर प्रेशर के बावजूद टाइम निकालते हैं, लेकिन समय बीतने के साथ ये प्रवृलि कम होती जाती है। डॉ. विचित्रा कहती हैं, समय की कमी शिफ्ट जॉब वालों के लिए बड़ी समस्या है। इसकी वजह से उनकी सेक्स लाइफ प्रभावित रहती है। जिन कपल्स के शिफ्ट टाइमिंग्स बदलते रहते हैं, उनकी सेक्स लाइफ और भी ज्यादा खराब हो जाती है। उनकी बॉडी क्लॉक बिगड़ती रहती है, जिसका असर उनकी सेक्स लाइफ पर दिखता है।

व्यस्त जीवन के कारण ऑफिस के बाद जो चार-पांच घंटे बचते थे, वो अब रोड पर ट्रेवलिंग में गुजर जाते हैं। ऐसे में क्वॉलिटी टाइम तो सिर्फ वीकेंड्स में ही निकल सकता है। कई बार काम का दबाव, घर का मैनेजमेंट और दोस्तों से मिलने के चक्कर में कपल्स वीकेंड्स में भी साथ नहीं रह पाते। ज्यादातर मेट्रो और मिनी मेट्रो शहरों में इस तरह की जीवनशैली एक बड़ी समस्या बन चुकी है। सेक्स डिजायर की कमी समय की कमी के साथ ऐसे कपल्स में सेक्स डिजायर की कमी भी देखी जाती है। आजकल एक्सपोजर का लेवल इतना ज्यादा है कि सेक्स जैसी गतिविधियों में लोगों को नयापन नहीं नजर आता। मसलन अखबार में एक खबर है, जिसमें एक अभिनेत्री को कस्टम ऑफिसर्स ने एयरपोर्ट पर रोक लिया था। खबर के साथ उस अभिनेत्री की बिकनी में फोटो लगाई गई है। इस तरह की चीजें नए दौर में आम हैं। इन सभी चीजों से लोगों में सेक्स डिजायर की कमी आ रही है। इस कारण भी लोग अब सेक्स की तरफ उतना आकर्षित नहीं होते। कंसीव करना मुश्किल आराधना और अमित भी ऐसे ही कपल हैं जिनके शिफ्ट जॉब्स हैं। शादी के वक्त दोनों अपने करियर बनाने की धुन में थे, इसलिए पांच साल तक बच्चा प्लान करने के बारे में सोचा ही नहीं। पांच साल बाद जब उन्होंने बच्चे के बारे में सोचा तो आराधना को कंसीव करने में बहुत दिक्कत हुई।

डॉ. विचित्रा कहती हैं, कई कपल्स ऐसी स्थिति से गुजरते हैं। मेरे पास जो वर्किग कपल्स आते हैं, उनकी वरीयता सूची पर शादी और बच्चा करियर के बाद आते हैं। करियर के लिए लोग बच्चा टालते हैं और बाद में मेडिकल कारणों से कंसीव करना मुश्किल हो जाता है। समाधान एक शब्द में कहें तो इस स्थिति का समाधान है एडजस्टमेंट।  सेक्स शादीशुदा जिंदगी का अहम हिस्सा है। यह जितना शारीरिक है, उतना ही भावनात्मक भी है। ऐसे में रिश्ते को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक-दूसरे की स्थितियों और दिनचर्या के साथ सामंजस्य बिठाना बेहद जरूरी है।

 1.दोनों पार्टनर्स में से एक को हाई प्रेशर जॉब से राहत ले लेनी चाहिए।  मैं ऐसे कपल को जानती हूं, जिसमें पति स्कूल टीचर हैं और पत्नी मार्केटिंग पर्सन हैं। इस मुद्दे को अगर लिंग से जोड़कर न देखा जाए तो इन दोनों ने बड़ी खूबसूरती से सामंजस्य बना रखा है। पति दोपहर दो बजे तक घर आ जाते हैं और घर का सारा काम करते हैं, बच्चों को पढ़ाते हैं, जबकि पत्नी देर शाम तक ही पहुंच पाती हैं। लोगों को यह गलत लगता होगा, लेकिन ये दोनों इस तरह जीवन को बेहतर ढंग से चला पा रहे हैं। ऐसा सामंजस्य बिठाने के लिए यह तय करना जरूरी है कि कौन अपने हाई प्रेशर जॉब को छोड़ने का समझौता करे। इस मामले में खुले दिमाग से लिया गया निर्णय सहायक होता है।

2.अगर एक पार्टनर सेक्स के लिए प्रेरित हो रहा हो, तो दूसरे को उसका सहयोग करना चाहिए। मना करने से आप कुछ अनमोल पलों को खो देते हैं।

3. पोर्नोग्राफी से जितना हो सके, दूर रहें। अगर देखें भी तो अपने पार्टनर के साथ। इससे पोर्नोग्राफी के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।

4. ध्यान रखें, सेक्स का कोई टाइम नहीं होता। यानी इसके लिए रात का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए समय से ज्यादा मूड की जरूरत होती है।

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