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100 साल का हुआ बिहार विधानसभा भवन, सेंट्रल हॉल में हुआ कथावाचन

पटना , बिहार विधानसभा भवन के निर्माण को आज सौ साल पूरे हो गए और इस मौके पर विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में दास्तानगोई’ (कथावाचन) का आयोजन किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सभा भवन की सौवीं सालगिरह पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि इस भवन में संचालित सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए, जिसके दूरगामी परिणाम हुए। उन्होंने बताया कि विधानसभा में ही बिहार भूमि सुधार विधेयक, 1950 पारित हुआ और यह कानून बना। बाद में इस कानून को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती भी दी गई।

श्री चौधरी ने बताया कि बिहार भूमि सुधार कानून, 1950 को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्रदान करने के लिए वर्ष 1951 में संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कर इसे संविधान की नौवीं अनुसूचि में शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि यह पहला संविधान संशोधन विधेयक है, जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी भी कानून को नाैवीं अनुसूचि में शामिल किए जाने के बाद उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह बिहार विधानसभा के लिए गौरव की बात है कि उसने ऐसा कानून बनाया, जिससे उत्पन्न परिस्थिति के लिए संसद से पहला संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया। उन्होंने बताया कि विधानसभा भवन के शताब्दी वर्ष समारोह के लिए पहले 07 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई थी लेकिन इस अवधि में दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार में बिहार के कई विधायकों के व्यस्त होने के कारण कार्यक्रम का आयोजन आज किया गया है।

इस मौके पर महमूद फारूकी ने एक राजकुमारी की दास्तां ‘दास्तान-ए-चौबोली’ पेश की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुन रशीद, संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार एवं ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव समेत कई गणमान्य मंत्री एवं नेता उपस्थित थे।

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