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देश मे सबसे कम उम्र के सरपंच बने अभिजीत पटेल, ‘लिम्का बुक’ में दर्ज होगा नाम

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के एक बच्चे को पिता बीच राह में छोड़ गये तो उसने गांव के ही हर चेहरे में रिश्ता टटोलना शुरू कर दिया।

नतीजा यह, कि हर घर से उसका ऐसा रिश्ता बना कि वह देश का सबसे कम उम्र का सरपंच बन गया।

जल्दी ही ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में बदायूं के गुराई गांव के सरपंच अभिजीत पटेल का नाम सबसे कम उम्र के सरपंच के तौर पर दर्ज होने जा रहा है।

22 साल 7 दिन की उम्र में यूपी के बदायूं के गुराई पंचायत के सरपंच बने
 हिमाचल प्रदेश की सबसे कम उम्र की सरपंच जुबना चौहान का रिकार्ड तोड़ा
 ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज होगा अभिजीत पटेल का नाम

 हर घर से जोड़ा रिश्ता-
दरअसल, इस किस्से की शुरूआत 2007 में ही हो गयी थी।

इसी साल पिता अजय पाल सिंह की बीमारी से मौत हुई तो अभिजीत गुमसुम सा हो गया।

इस दौरान पूरे गांव के साथ उसका ऐसा रिश्ता बना कि हर घर का दुख-सुख उसका अपना सा हो गया।

बड़े होते अभिजीत की गांव गढ़ने की खदबदाहद से गांव के बड़े बुजुर्ग ऐसा प्रभावित हुए कि उसे सरपंच के चुनाव में ही उतार दिया।

6 जुलाई 2019 को वोट पड़ा और 8 जुलाई को नतीजे आ गये।

और इस तरह अभिजीत पटेल देश के सबसे छोटी उम्र के प्रधान बन चुके थे।

हिमाचल प्रदेश की जबना का रिकार्ड तोड़ा-

दरअसल, भारत में सबसे कम उम्र की सरपंच का रिकार्ड फिलहाल जबना चौहान के नाम दर्ज है।

हिमाचल के मंडी जिले की थर्जुन पंचायत की सरपंच जबना चौहान दरअसल 22 साल 4 महीने की उम्र में सरपंच बनी थीं।

1 जुलाई 1997 को जन्मे अभिजीत पटेल ने 22 साल 7 दिन की उम्र में सरपंच बनकर जबना का ही रिकार्ड तोड़ा है।

पंचायत की तस्वीर बदलने में जुटे अभिजीत-

सरपंच के तौर पर अभिजीत पटेल की उम्र भले ही थोड़ी छोटी हो।

लेकिन उनके हौसले आसमानी हैं और इरादे बुलन्द।

गांव में, गांव के ही युवाओं की एक टीम गढ़कर अभिजीत ने तस्वीर बदलने का काम शुरू कर दिया है।

अपनी पंचायत को देश की सबसे खास पंचायत बनाने के लिए अभिजीत ने जरूरी कामों को दो हिस्सों में बांटा है।

पहले हिस्से में वो काम कराये जा रहे हैं जिसके लिए किसी की खास मदद की जरूरत नहीं हैं।

मसलन, देश में नया ट्रैफिक रूल लागू होने से पहले ही अभियान चलाकर पंचायत के 16 साला हर युवा का ड्राइंविंग लाइसेंस बनवा दिया गया था।

गांव को सफाई और हरा-भरा रखने, स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की मौजूदगी का ख्याल युवाओं की इसी टीम ने करीने से संभाल रखा है।

गांव के बड़े-बूढ़ों की पेंशन, महिलाओं के लिए सिलाई केन्द्र चलाने का जिम्मा भी अभिजीत की प्राथमिकता लिस्ट में था।

इन सब से फुर्सत पाकर अब अभिजीत गांव में सड़कों का जाल बिछाने की कवायद में जुटे हैं।

परिवार ने लिया है सेवा का संकल्प-

दरअसल, सत्ता से सेवा के मार्ग का संस्कार अभिजीत को परिवार से भी मिले हैं।

चाचा राजेश्वर सिंह पटेल बदायूं की सियासत का जाना माना नाम हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड की डायरेक्टर मेखला सिंह का नाम भी समाजसेवा के क्षेत्र में किसी परिचय का मोहताज नहीं।

परिवार की इसी परंपरा को अभिजीत बेशक आगे बढ़ाते दिख रहे हैं।

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