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अखिलेश यादव – लीक से हटकर चलने की आदत, कुछ खास बातें

लखनऊ, सियासत मे ये हिम्मत बहुत ही कम नेताओं मे होती है कि वह लीक से हटकर चलें. लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मे ये हिम्मत और ऊर्जा मौजूद है और जब मौका मिलता है वह नया रास्ता अपनाने से चूकते नही हैं.

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अखिलेश यादव एक इंजीनियर, एग्रिकल्चरिस्ट और सामाजिक-राजनीतिक नेता हैं. फुटबॉल और क्रिकेट में दिलचस्पी रखते हैं.  खाली वक्त में किताब पढ़ना, म्यूजिक सुनना और फ़िल्म देखना पसंद करते हैं. अखिलेश यादव को पॉप म्यूजिक पसंद है.

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 अखिलेश यादव ने स्कूल की पढ़ाई राजस्थान के धौलपुर सैनिक स्कूल से की थी. इसके बाद उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से सिविल इन्वाइरन्मेंटल इंजीनियरिंग में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री ली और यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी मे पढ़े. 24 नवंबर 1999 को पारिवारिक परंपराओं को तोड़ते हुये अखिलेश यादव ने   डिंपल  से अंतर्जातीय विवाह किया. अखिलेश और डिपंल की दो बेटियां (अदिति, टीना) और एक बेटा अर्जुन है.

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उपचुनाव: कैराना लोकसभा सीट पर अखिलेश यादव ने एकबार फिर खेला बड़ा दांव…

 2000 में पहली बार अखिलेश यादव 27 साल की उम्र में कन्नौज से लोकसभा सांसद चुने गए. इसके बाद वह लगातार दो बार सासंद रहे. 10 मार्च, 2012 में अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया. 15 मार्च, 2012 में वह देश में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने.

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 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अथक परिश्रम कर, समाजवादी पार्टी को जीत दिलाकरअखिलेश यादव भारतीय राजनीति में  युवा राजनेता के रूप में चर्चित हुये.  मात्र 38 साल की उम्र में  देश के सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश की कुर्सी संभालकर उन्होने दिग्गजों की जमीन खिसका दी.

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 युवा मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होने समाजवादी पार्टी की पारंपरिक छवि को बदल कर रख दिया. अंग्रेजी विरोधी और जातिवादी छवि से मुक्त कराकर उन्होने बूढ़े नेताओं से भरी पार्टी मे युवाओं को आगे बढ़ाकर, उसे ऊर्जा से भर दिया. साथ ही समाजवादी पार्टी  को नई तकनीक और बदलावों के साथ आगे बढ़ने वाली पार्टी के रूप मे भी चर्चित कर दिया.

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मायावती और अखिलेश यादव अब इस मामले मे भी हुए एक समान…

 हाल ही मे बसपा अध्यक्ष मायावती से उन्होने गठबंधन कर उन्होने अपने राजनैतिक फैसले से एकबार फिर सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों मे हलचल पैदा कर दी है. गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव जीतकर, खोयी प्रतिष्ठा जहां दोबारा प्राप्त करने की शुरूआत की. वहीं कैराना और नूरपुर उपचुनावों मे रालोद से अनोखा गठबंधन कर बीजेपी की धड़कनें बढ़ा दी हैं.

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