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पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल, को दो साल बाद मिली सशर्त जमानत

मुंबई ,  बंबई उच्च न्यायालय ने धनशोधन के एक मामले में राकांपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल को उनकी बढ़ती उम्र और खराब सेहत की वजह से आज जमानत दे दी। उन्हें दो साल से ज्यादा वक्त पहले प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।

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न्यायमूर्ति पीएन देशमुख ने 70 वर्षीय भुजबल को 14 मई तक पांच लाख रुपये का निजी मुचलका जमा करने या इतनी ही राशि की नकद जमानत देने को कहा। न्यायाधीश ने उनकी उम्र और बिगड़ती सेहत समेत अन्य मुद्दों पर विचार किया। अभी विस्तृत आदेश का इंतजार है। इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता पर कई शर्तें भी लगाई हैं। उन्हें जब भी पूछताछ के लिए बुलाया जाए वह ईडी के सामने पेश होंगे तथा सुनवाई शुरू होने के बाद निचली अदालत में हाजिर होंगे।

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 भुजबल को निचली अदालत की इजाजत के बिना शहर नहीं छोड़ने की भी हिदायत दी गई है। न्यायमूर्ति देशमुख ने कहा कि उन्हें मुकदमे या गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने के प्रयास नहीं करने चाहिए। उन्होंने भुजबल को चेताया कि अगर किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो जमानत रद्द कर दी जाएगी।

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 भुजबल के पास कांग्रेस राकांपा सरकार में लोक निर्माण विभाग का जिम्मा था। उन्हें मार्च 2016 में गिरफ्तार किया गया था। ईडी की जांच में पाया गया था कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं के अनुबंध देने में अपने दफ्तर का कथित रूप से दुरूपयोग किया है , जिससे सरकारी खजाने को नुकसान उठाना पड़ा।

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ईडी के मुताबिक , भजुबल ने दिल्ली में राज्य के गेस्ट हाउस महाराष्ट्र सदन के निर्माण के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया। आरोप है कि उन्होंने रिश्वत के बदले में यह ठेका कंपनी को दिया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि उनके भतीजे समीर भुजबल ने अवैध पैसों को मुखौटा कंपनियों में पहुंचाने का काम किया।

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समीर पूर्व सांसद हैं और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया था। उसकी जमानत अर्जी उच्च न्यायालय में लंबित है। दिसंबर , 2017 में एक विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने दलील दी कि उनकी हाल में एंजियोप्लास्टी हुई है। साथ में वह कई बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बीमारियों के लिए अच्छे इलाज की जरूरत है। अदालत ने कहा कि सरकारी अस्पताल उन्हें पर्याप्त इलाज मुहैया कराने में पूरी तरह से सक्षम है।

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भुजबल ने इस साल के शुरू में जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रूख किया और उच्चतम न्यायालय के नवंबर 2017 के आदेश का हवाला दिया जिसमें शीर्ष अदालत पीएमएलए की धारा 45 को रद्द कर दिया था। यह धारा इस अधिनियम के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत देने पर रोक लगाती है। उन्होंने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि उनकी उम्र , खराब सेहत पर विचार किया जाए तथा इस तथ्य को भी देखा जाए कि उनके खिलाफ जांच पूरी हो गई तथा आरोप पत्र दायर हो चुका है। वह आर्थर रोड जेल में बंद थे।

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