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प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव पर केंद्रित होगा, इस साहित्यिक पत्रिका का विशेषांक

लखनऊ, प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव पर एक साहित्यिक पत्रिका  विशेषांक प्रकाशित करने जा रही  है। वीरेंद्र यादव पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण लखनऊ मे होगा।

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साहित्यिक पत्रिका “कथाचली  ”  वीरेंद्र यादव पर केंद्रित विशेषांक प्रकाशित करेगी।  प्रसिद्ध वामपंथी आलोचक प्रो वीरेंद्र यादव पर केंद्रित विशेषांक का लोकार्पण 26 मार्च को शाम साढ़े चार बजे, लखनऊ के पेपर मिल कालोनी , निशातगंज स्थित  कैफी आजमी अकादमी सभागार मे किया जायेगा। साहित्यिक पत्रिका “कथाचली  ” के संपादक शाश्वत रतन और शैलेश सिंह हैं।

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इस अवसर पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय “आज की चुनौतियों के संदर्भ मे साहित्यिक पत्रकारिता  ” है। संगोष्ठी मे मुख्य वक्ता प्रो0 रूपरेखा वर्मा, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, शिव मूर्ति, शकील सिद्दिकी, शैलेन्द्र सागर, प्रीती चौधरी,  नवीन जोशी, राकेश अखिलेश, नलिन रंजन, देवेंद्र, अनिल त्रिपाठी हैं। संगोष्ठी का संचालन सूरज बहादुर थापा करेंगे।

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प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव की साहित्यिक आलोचना और टिप्पणी को लोग साहित्यिक मंचों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बड़े चाव से पढ़तें हैं। प्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव के अनुसार, साहित्यकार राजेंद्र यादव ने प्रेमचंद की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने साहित्य में अभिजात्य का वर्चस्व तोड़ा है। हाशिये के समाज को साहित्य का केंद्र बिंदु बनाया है।

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वीरेंद्र यादव के शब्दों मे हंस पत्रिका के संपादक के रूप में उन्होंने जिन ज्वलंत मुद्दों को उठाया था, वह आज और भी प्रासंगिक हैं। राजेंद्र यादव किसी एक विचार तक सीमित करना उचित नहीं होगा। उनका व्यक्तित्व सार्वजनिक था। उन्होंने व्यक्तिपूजा नहीं की और अपनी भी मूर्ति नहीं बनवाई। मुक्तिबोध को कोट करते हुए वीरेंद्र यादव का कहना है कि ‘ब्राह्मणवादी लेखकों को मुक्तिबोध का लेख प्रेत के रूप में लगता है यही कारण है कि लोग कबीर को पढ़ने से डरते हैं।’

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