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पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी चुने गये, बीजेपी विधायक दल का नेता

रांची,  झारखंड में हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को आज पार्टी के विधायक दल का नेता चुन लिए जाने से उनका प्रतिपक्ष का नेता बनने का रास्ता साफ हो गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सह राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने यहां भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बैठक में सभी विधायकों की सर्वसम्मति से श्री मरांडी को पार्टी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। उन्होंने बताया कि भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में श्री मरांडी के नाम का प्रस्ताव राजमहल से पार्टी के विधायक अनंत ओझा ने किया, जिसका खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, बोकारो के विधायक बिरंची नारयण और जमुआ के विधायक केदार हाजरा ने समर्थन किया।

श्री सिंह ने बताया कि श्री मरांडी काे भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के साथ ही पिछले दिनाें श्री मरांडी के नेतृत्व में झारखंड विकास मोर्चा (झाविमाे-प्रजातांत्रिक) का भाजपा में विलय किए जाने की जानकारी विधानसभा सचिवालय काे आवश्यक कार्रवाई के लिए साैंप दी गई है। अब इन दाेनाें ही मामलाें में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महताे काे निर्णय लेना है।

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया कि बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव तथा पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि इस बैठक में बाघमारा से विधायक ढुल्लू महतो को छोड़कर पार्टी के सभी विधायक मौजूद थे।
श्री सिंह ने कहा कि श्री मरांडी अनुभवी और सरल नेता है। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में गठबंधन की सरकार बनी है। कुछ ही महीनों में सरकार के खिलाफ जनआक्रोश दिख रहा है। नक्सली समस्या लगातार बढ़ रही है। गठबंधन की सरकार बनने के बाद अबतक 20 से अधिक नक्सली घटनाएं हो चुकी है।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने राज्य की मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि खजान खाली होने की बात कहकर सरकार बचाव की मुद्रा में दिख रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को हेमंत सरकार बंद करने पर तुली हुई है। उन्होंने पत्थलगड़ी का उल्लेख करते हुए कहा उन्होंने सोचा था कि मौजूदा सरकार एक-दो साल बाद संघर्ष का मौका देगी लेकिन जिस तरह का कुशासन हेमंत सरकार चला रही है, ऐसे में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाना जरूरी हो गया है और विधानसभा में इसका नेतृत्व श्री मरांडी करेंगे।

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