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गिरीश कर्नाड की नही निकली शवयात्रा, बिना राजकीय सम्मान के हुआ अंतिम संस्कार

बेंगलुरु ,  भारतीय रंगमंच के शिखर पुरुष और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक, अभिनेता एवं फिल्म निर्देशक गिरीश कर्नाड की अंतिम यात्रा कई अर्थों मे अलग रही।

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श्री कर्नाड का दोपहर बाद यहां एक श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर केवल उनके परिवार के सदस्य तथा करीबी मित्र ही मौजूद थे। कर्नाटक सरकार उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करना चाहती था लेकिन परिवार के सदस्यों ने यह स्वीकार नही किया। श्री कर्नाड की अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी शव यात्रा नहीं निकाली गयी और अंतिम संस्कार में किसी विशिष्ट व्यकित को भी शामिल होने की अनुमति नहीं थी। मीडिया को भी इस दौरान वहां मौजूद रहने की इजाजत नहीं थी।

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गिरीश कर्नाड का सोमवार सुबह साढ़े छह बजे यहां निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और लंबे समय से श्वास संबंधी बीमारी से पीड़ित थे।
श्री कर्नाड के निधन की खबर मिलते ही उनके प्रशंसकों की भीड़ जमा हो गई और सोशल मीडिया पर उनका श्रद्धांजलि देने वालों का सुबह से ही तांता लग गया कर्नाटक सरकार ने राज्य में सोमवार को अवकाश और तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

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श्री कर्नाड के निधन की खबर मिलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंदए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधीए सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के अलावा साहित्य अकादमी, संगीत नाट्य अकादमी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा देश के जाने माने रंगकर्मियों और रंग समीक्षकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और भारतीय रंगमंच के इतिहास की एक बड़ी क्षति बताया हैं।

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श्री कोविंद ने ट्वीट कर कहा, श्लेखक,  अभिनेता और भारतीय रंगमंच के सशक्त हस्ताक्षर गिरीश कर्नाड के देहावसान के बारे में जानकर दुख हुआ है। उनके जाने से हमारे सांस्कृतिक जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। उनके परिजनों और उनकी कला के अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी शोक.संवेदनाएं।

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श्री मोदी ने कहा,  श्गिरीश कर्नाड को उनके बहुमुखी अभिनय के लिए हमेशा याद किया जाएगा। अपनी पसंद के मुद्दों पर उन्होंने पूरे उत्साह के साथ अपने विचार व्यक्त किये। उनके कार्य आने वाले वर्षों में भी लोकप्रिय बने रहेंगे। उनके निधन से दुखी हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। श्री गांधी ने कहा कि श्री कर्नाड के निधन से देश ने अपना एक प्रिये पुत्र खो दिया है। उनके रचनात्मक कार्यों से उन्हें हमेशा याद किया जायेगा। वह एक नाटकारए अभिनेताए निदेशक के साथ.साथ एक बहतरीन इंसान थे।

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श्री जावड़ेकर ने कहा, भारतीय फिल्म कलाकार गिरीश कर्नाड के निधन से दुखी हूं। उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।माकपा केंद्रीय समिति की आज की बैठक के प्रारंभ में ही श्री कर्नाड के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया गया। साहित्य अकादमी में भी अपने शोक संदेश में श्री कर्नाड को भारतीय रंगमंच और कन्नड़ साहित्य की एक प्रमुख हस्ती बताया है तथा उनके मशहूर नाटक ययाति, तुगलक, हयवदन, नागमंडल, अंजुमल्लिगे आदि को महत्वपूर्ण नाट्य कृति बताया है।

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