ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ, बड़ा विरोध प्रदर्शन

भिवानी,  कोलकाता में दो दिन पहले भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान मचे बवाल के बाद समाज सुधारक और भारतीय नवजागरण के शिल्पी ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के विरोध में सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया  कम्युनिस्ट के कार्यकर्ताओं ने आज यहां विरोध प्रदर्शन किया।

कार्यकर्ताओं ने नेहरू पार्क के पास धरना.प्रदर्शन किया जिसे एसयूसीआई के भिवानी जिला कमेटी के सदस्यों ने और छात्र.युवाए महिला व किसान.मजदूर फ्रंटल संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की प्रतिमा को ऐसे समय में ध्वस्त किया गया है, जब पूरा देश उनकी 200वीं जयंती मनाने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय पुनर्जागरण से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तकए वह भारत की उन महान हस्तियों में से एक थे, जो भारत में धर्मनिरपेक्ष मानवतावादी सोच के लिए अडिग खड़े रहे।

रवींद्रनाथ टैगोर, विवेकानंद, देशबंधु सीआर दास, शरतचंद्र से लेकर सुभाषचंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु, आचार्य प्रफुल्लचन्द्र राय, काजी नजरुल इस्लाम सभी ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर से प्रेरणा ली लेकिन दुख है कि आज विद्यासागर की मूर्ति को अज्ञानी लोगों की भीड़ ने तोड़ा है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा पारंपरिक मध्ययुगीन सामंती सोच की वाहक है, जो आज पतनशील पूंजीवाद के हितों के अनुकूल है और यही सोच ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रचारित प्रगतिशील, धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक विचारों से डरती है

जबकि इस महापुरुष ने ब्राह्मणवाद और रूढ़िवादी विचारों के खिलाफ 19वीं शताब्दी के मध्य में आवाज उठाने की हिम्मत की थी।

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