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जानिए: ‘मेक इन इंडिया’ के लिए डॉ. कलाम ने क्या सावधानी बरतने को कहा था?

kalam-saab-make-in-indiaनई दिल्ली (18 अक्टूबर):दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को लेकर काफी सजग और सावधान थे। उन्होंने इस योजना के बारे में सावधान करते हुए कहा था, कि यह योजना काफी महात्वाकांक्षी है। लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं भारत एक लो-कॉस्ट (कम कीमत), लो वैल्यू (कम अहमियत) का एक स्थान ना बन जाए।

इसी तरह ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान पर भी उन्होंने अपनी राय रखी थी। उन्हें लगता था कि भारत के पास अपनी नॉलेज कनेक्टिविटी का सक्रियता से इस्तेमाल करने की क्षमता है। जिसकी गांवों और सुदूर इलाकों में जरूरत है। ”हमें निचले स्तर की साक्षरता, भाषा और अनुकूलित सामग्री के बीच में अंतर कम करने की जरुरत है।”

डॉ कलाम की ये राय उनकी जल्दी ही प्रकाशित होने वाली किताब ”एडवांटेज इंडिया: फ्रॉम चैलेंजेस टू अपरच्यूनिटीज (चुनौतियों से अवसरों तक)” में व्यक्त किए गए हैं। यह किताब डॉ कलाम और उनके सहयोगी सृजन पाल सिंह ने लिखी है।

‘हॉर्पर कोलिंस इंडिया’ प्रकाशन हाउस इस किताब को प्रकाशित कर रहा है। इसमें डॉ कलाम के अंतिम अधूरे भाषण को भी संकलित किया गया है। जो उन्होंने अपने अंतिम दिन 27 जुलाई को आईआईएम शिलांग में दिया था। जिसके दौरान ही वे गिर पड़े थे। जिसके बाद उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली थी।

इस किताब में उन्होंने साफ तौर पर सावधान करते हुए लिखा है, ”हमें इसपर काफी स्पष्ट हो जाना चाहिए। मेक इन इंडिया काफी महात्वाकांक्षी योजना है। लेकिन हमें ऐसी ऊंची आशाओं की जरूरत है। मैं सहमत हूं कि बुनियादी ढ़ांचे को लेकर हम चिंतित हैं।… लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत दुनिया के लिए कहीं एक लो-कॉस्ट, लो-वैल्यू असेंबली लाइन ना बन जाए। अगर हम इस रास्ते पर निकल गए तो तरक्की लोगों के लिए एक बड़ी कीमत और दर्द के साथ आएगी।”

डॉ कलाम साफ तौर पर भारत में डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए वास्तविक शोध पर जोर देते थे। जिनमें नौजवानों के विचारों और युगों के ज्ञान के साथ लोकतंत्र का बेहतर इस्तेमाल किया जाए।

 
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