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धार्मिक दिखने वाले नेता भी चाहतें हैं, मंदिर-मस्जिदों से दूर रहने वाली इस देवी की कृपा

नई दिल्ली, चुनाव पास आते ही नेताओं ने धार्मिक स्थलों के चक्कर लगाने शुरू कर दिये हैं।  इसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पूर्व सीएम अखिलेश यादव आदि बड़े-बड़े नेता शामिल हैं। लेकिन एक राष्ट्रीय नेता एेसी भी हैं जिन्हे कभी मंदिर-मस्जिदों का चक्कर लगाते किसी ने न देखा होगा । इसके बावजूद वह जनता मे लोकप्रिय हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिरों मे जाना तो आम है लेकिन अब उन्होने मस्जिदों मे भी जाना शुरू कर दिया है। अभी हाल ही मे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिया मुस्लिमों के दाऊदी बोहरा समुदाय के अशरा मुबारक कार्यक्रम में इंदौर मे शामिल हुए हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान भी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे।

हाल ही में पीएम मोदी जून माह में सिंगापुर के दौरे पर गए थे। उस दौरान भी वह सिंगापुर की मशहूर चुलिया मस्जिद गए थे।  इससे पहले पीएम मोदी मई में इंडोनेशिया गए थे। उस दौरान भी पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की सबसे मशहूर मस्जिद इश्तकलाल मस्जिद का दौरा किया था।  साल 2015 में अपने यूएई दौरे के दौरान भी पीएम मोदी ने वहां की मशहूर शेख जायद ग्रांड मस्जिद का दौरा किया था।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का मंदिर जाना लगातार जारी है। गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मंदिरों में जाने से लेकर कैलास मानसरोवर यात्रा तक राहुल का ‘टेंपल रन’ चर्चा में रहा है। कुछ सियासी पंडित राहुल गांधी के मंदिरों में किए जा रहे इस दौरे को उनके हिंदुत्व के कार्ड खेलने से जोड़कर देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नवरात्र व्रत शुरू हो गया है। अब अगले नौ दिनों तक दोनों पूरी तरह से धार्मिक रहेंगे।  प्रसिद्ध गोरखधाम पीठ के मुखिया योगी आदित्यनाथ पूरे नौ दिनों तक नवरात्र के सारे रीति-रिवाज निभाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव नवरात्र का व्रत रखते हैं। सरकार मे आने पर उन्होंने इटावा में भगवान विष्णु का विशाल मंदिर और उनके नाम से एक टाउनशिप बनाने का एेलान भी किया है। अभी हाल ही मे मध्य प्रदेश की यात्रा के दौरान उन्होने खजुराहो में दसवीं सदी के जैन मंदिर में प्रवास कर रहे परम पूज्य 108 आचार्य विद्या सागर जी महाराज से भेंट की।

वहीं बहुजन समाज पार्टी  की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती धार्मिक स्थलों  से दूरी बनाकर रखती हैं। उन्हें आज तक कभी भी दीपावली, होली या दूसरे हिंदू त्योहार मनाते भी नहीं देखा गया। नाही किसी मस्जिद के चक्कर काटते देखा गया है। इसके बावजूद वह हिंदू,  मुस्लिम, सिक्ख , ईसाई सभी धर्मों के लोगों मे लोकप्रिय हैं। उन्हे हिंंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के वोट बहुतायत मे मिलतें हैं।

मायावती के धार्मिक स्थलों  से दूरी बनाकर रखने के बावजूद क्या कारण है कि मंदिर मस्जिदों के चक्कर लगाने वाले ये बड़े से बड़े नेता मायावती की कृपा चाहतें हैं। बीजेपी, कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय दल हों या समाजवादी पार्टी, राजद जैसे क्षेत्रीय दल हों सबकी ख्वाहिश है कि चुनाव मे बहनजी का साथ मिल जाये तो बेड़ा पार हो जायेगा।

क्या धार्मिक दिखने वाले इन बड़े नेताओं की मंदिर-मस्जिदों मे सुनवाई नही हो रही है, जो इन्हे इस जनता की देवी की  कृपा चाहिये। इससे ये सिद्ध होता है कि  मंदिर-मस्जिदों का चक्कर न लगाने वाली इस जनता की देवी के पास, उन बड़े नेताओं से कहीं ज्यादा शक्ति है, जो वोट के लिये मंदिर-मस्जिदों का चक्कर लगाते घूम रहें हैं. सबसे खास बात यह है कि मायावती के वोटर ज्यादातर एेसे वर्ग से हैं जिन की मंदिर – मस्जिद मे सबसे अधिक आस्था है.

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