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उर्दू सम्पादकों का सम्मेलन – खबरों में विश्लेषण को पत्रकारिता के लिए बताया खतरनाक

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कोलकाता, देश की अग्रणी संवाद समिति यूनाइटेड न्यूज आॅफ इंडिया (यूएनआई) के प्रमुख अशोक उपाध्याय ने आज कहा कि खबरों को पूरी ईमानदारी से पेश किया जाना चाहिए और इसमें किसी व्यक्तिगत राय तथा विश्लेषण की जगह नहीं होनी चाहिए, उर्दू सम्पादकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

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यूएनआई के प्रमुख  ने कहा कि खबरों में विश्लेषण पत्रकारिता के लिए खतरनाक है और यह समाज पर प्रतिकूल असर डालता है। उन्होंने कहा कि अखबार के सम्पादक खबरों को खबर ही रहने दें और पूरी सच्चाई के साथ उसे प्रस्तुत करें। समाचारों में व्यक्तिगत टिप्पणियां या विचार नहीं होने चाहिए और इसके विश्लेषण की बजाय इसे पाठकों पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा,“ मुझे यह कहते हुए संकोच नहीं है कि एजेंसियों, विशेषकर यूएनआई और यूनीवार्ता में खबरों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जाती है। एक दो घटनाओं को छोड़कर 57 साल के इतिहास में हमारी एजेंसी अपने को तटस्थ रखने में कामयाब रही है।”

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अशोक उपाध्याय ने उर्दू पत्रकारिता के दायरे को बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि उर्दू को अन्य भाषाओं तक पहुंचाने की जरूरत है क्योंकि देश की खूबसूरती इसी में छिपी है। हिन्दी उर्दू के बिना अधूरी है। कविताओं में बहुत-सारे शब्द उर्दू के हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी और उर्दू एक दूसरे की शक्ति हैं और यह शक्ति ही धर्मनिरपेक्षता, प्रेम और भाईचारे के अस्तित्व में छिपी हुयी है। उपाध्याय ने यूएनआई उर्दू सेवा की चर्चा करते हुए कहा,“हमें उर्दू सेवा पर गर्व है। हम इसे आगे बढ़ाकर क्षेत्रीय स्तर तक विस्तार करेंगे। यूएनआई उर्दू सेवा में शुरुआत से कई सुधार किये गये हैं और हम इस सेवा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर कर रहे हैं।”

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दैनिक उर्दू समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान’ के सम्पादक सरफराज अारजू ने कहा कि उर्दू पत्रकारिता का अंग्रेजी अथवा हिंदी से कोई तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि सरकार की ओर से जिस प्रकार अंग्रेजी और हिंदी को मदद दी जाती है वैसी उर्दू को नहीं दी जाती है। दैनिक समाचार पत्र ‘खबर जदीद’ के सम्पादक मासूम मुरादाबादी ने उर्दू पत्रकारिता पर लगाये जाने वाले सांप्रदायिकता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह वास्तविकता से कोसों दूर है। उर्दू के पत्रकारों ने देश की आजादी और देश के विकास में अहम भूमिका निभायी है।

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