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कभी पिछड़े वर्गों को भी मिला था, प्रोन्नति में आरक्षण

akhilesh at Ambedkar Mahasabhaलखनऊ,  यूपी मे दलित वर्ग प्रोन्नति में आरक्षण के मसले पर अकेले लड़ाई लड़ रहा है। ज्यादातर पिछड़े वर्ग के लोग ये मान बैठे हैं कि उनका इस लड़ाई से कोई लेना देना नही है। जबकि अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष डा० लालजी निर्मल की फेसबुक पर ये दो पोस्ट पिछड़े वर्ग के लोगों की आंखे खोलने के लिये काफी है।

उत्तर प्रदेश में कभी पिछड़े वर्गों को भी प्रोन्नति में आरक्षण मिला था | यह तब हुआ जब सूबे में पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री हुआ |वर्ष 1977 में जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रामनरेश यादव बने तब 20 अगस्त 1977 के द्वारा पिछड़े वर्गों को नियुक्ति एवं प्रोन्नतियों में 15 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था जो 9 वर्षों तक लागू रहा |वर्ष 1978 में पी सी एस जे के 150 पद विज्ञापित हुए जिसमे 23 पद पिछड़े वर्गों को भी आरक्षित थे |इस आरक्षण के विरूद्ध छोटे लाल पांडे ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की |जस्टिस टी एस मिश्र और के एन गोयल की खंड पीठ ने २ फरवरी 1979 को पिछड़े वर्गों के आरक्षण से सम्बंधित शासनादेश को संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति पर फरेब कह कर उसे समाप्त कर दिया किन्तु सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश दे दिया जो 9 वर्ष तक चला |सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 1987 को राज्यसरकार की अपील ख़ारिज कर दी और इसी के साथ पिछड़े वर्गों को नियुक्ति और प्रोन्नति में दिया गया आरक्षण समाप्त हो गया |जस्टिस चिनप्पा रेड्डी,जस्टिस कानिया और जस्टिस जगन्नाथ शेट्टी ने लिखा कि उन्हें बताया गया कि पिछड़े वर्गों के छानबीन के प्रश्न पर दूसरा आयोग नियुक्त किया गया है जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है और वह रिपोर्ट प्रदेश सरकार के समक्ष विचाराधीन है इसलिए अपील के गुणों पर विचार न करते हुए अपील ख़ारिज की जाती है |डा छेदी लाल साथी अध्यक्ष सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस मामले में जब छानबीन की तो ज्ञात हुआ कि सरकारी वकील ने झूठा बयान दे कर अपील ख़ारिज करवा दी |साथी जी का कहना था कि सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 मई 1977 को दे दी थी और उसके बाद न तो उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के लिए कोई आयोग गठित हुआ और न ही कोई रिपोर्ट सरकार के समक्ष विचाराधीन थी |

अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष डा० लालजी निर्मल की फेसबुक वाल से साभार….

राजनीती भी कितनी अधम है |राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने यह कहा था कि समीक्षा तो इस बात के लिए होनी चाहिए कि पिछड़े वर्गों को आरक्षण मिलने में 40 वर्ष का विलंब क्यों हुआ | न्यायपालिका में आरक्षण क्यों नहीं है |दलितों पिछडो का कोटा पूरा क्यों नहीं हो पाया | अब उनके इस बयान की भी आलोचना हो रही है |

अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष डा० लालजी निर्मल की फेसबुक वाल से साभार….

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