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1855 से पहले अयोध्या विवादित स्थल पर, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं

नयी दिल्ली,  उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की तेरहवें दिन सुनवाई हुई, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने स्वीकार किया कि 1855 से पहले वहाँ नमाज पढ़े जाने का साक्ष्य नहीं है।

निर्मोही अखाड़ा की ओर से पेश सुशील कुमार जैन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दलील दी कि विवादित ढाँचे में मुस्लिमों ने 1934 के बाद से कभी नमाज नहीं पढ़ी।

श्री जैन ने दलील दी कि विवादित स्थल पर मंदिर ही था, जिसकी देखरेख निर्मोही अखाड़ा करता रहा है।

इस स्थल पर हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मौजूद थीं।

इस पर मुस्लिम पक्ष ने स्वीकार किया कि 1855 से पहले विवादित स्थल पर नमाज पढ़े जाने का साक्ष्य नहीं है।

संविधान पीठ में न्यायमूर्ति गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं।मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

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