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अब बीजेपी की सहयोगी पार्टियां भी नोटबंदी को लेकर बीजेपी पर हुईं हमलावर

note1नई दिल्ली,  नोटबंदी को लेकर दिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर अब केंद्र की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने ही उसे घेरना शुरू कर दिया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पीएम को निशाने पर रखते हुए पूछा है कि यदि 1971 में नोटबंदी की सलाह न मानने के चलते अर्थव्यवस्था में गिरावट आई थी, तो इसके बाद मोरारजी देसाई की सरकार द्वारा 1978 में इसे लागू करने के बाद ही कौन सी अर्थव्यवस्था बेहतर हो गई थी।

एक रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यह बातें कहीं। उन्होंने यह बातें पीएम मोदी के उस बयान के जवाब में कहीं थीं जिसमें उन्होंने यूपी की एक रैली में कहा था कि 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी नोटबंदी की सलाह दी गई थी, लेकिन इच्छा शक्ति न होने के चलते उन्होंने इसको नजरअंदाज करते हुए लागू नहीं किया था।

केंद्र की सहयोगी शिवसेना नोटबंदी के साथ-साथ कई मुद्दों पर सरकार को घेरती आई है। इससे पहले नोटबंदी से लोगों को हो रही परेशानियों पर भी शिवेसना ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। पीएम मोदी के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी 1971 में नोटबंदी का फैसला न लेने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि उनके पास इस संबंध में निर्णय लेने और उसे लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए विमुद्रीकरण का निर्णय लिया। यह बात प्रसाद ने शनिवार को विमुद्रीकरण के मुद्दे पर भाजपा आरटीआइ सेल द्वारा एडवोकेट राजेशवर नागपाल के संयोजन में मावलंकर हॉल में एक कार्यशाला के दौरान कही।

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