चौंकाने वाला खुलासा-जानिये, समाजवादी पार्टी का रिमोट किसके हाथ मे है ?
October 18, 2017
लखनऊ, पिछले एक साल से समाजवादी पार्टी मे नेतृत्व को लेकर भारी उथल -पुथल चला. कभी कोई बहुत पावरफुल नजर आया तो कभी कोई और. समाजवादी पार्टी मे वर्चस्व को लेकर परिवार मे ही लोगों ने आपस मे एकदूसरे पर वार किया.
5 अक्टूबर को आगरा में हुये सपा के दसवें राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि समाजवादी पार्टी की कमान अब पूरी तरह अखिलेश यादव के हाथ मे है. अब अगले पांच साल के लिए अखिलेश यादव ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे. डॉ. रामगोपाल ने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव और वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.
समाजवादी पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा नये राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कर दी है. राष्ट्रीय कार्यकारिणी मे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का नाम नही है, वैसे तो वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव का नाम भी नही है. लेकिन अगर यह कहा जाये कि आज भी समाजवादी पार्टी का रिमोट किसी और के हाथ मे है, तो यह निश्चय ही चौंकाने वाली बात होगी. लेकिन हकीकत यही है. समाजवादी पार्टी का रिमोट कल भी मुलायम सिंह यादव के हाथ मे था और आज भी मुलायम सिंह यादव के हाथ मे है.
दरअसल, यही मुलायम सिंह यादव के राजनीति करने का अंदाज है, जिसके कारण मुलायम सिंह यादव को करीब से जानने वाले कहतें हैं कि-मुलायम सिंह को समझना या उनके मन मे क्या चल रहा है जानना, मुश्किल ही नही नामुमकिन है.
मुलायम सिंह यादव के परिवार के 18 सदस्य राजनीति मे हैं. मुलायम सिंह का परिवार देश मे किसी भी पार्टी में सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार है। खासियत ये है कि बाकी राजनीतिक परिवारों से अलग मुलायम सिंह का पूरा परिवार आज भी एक ही पार्टी में है यानि सभी 18 सदस्य समाजवादी पार्टी का हिस्सा हैं जिसे 75 साल के मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया है।
मुलायम सिंह यादव की शुरू से इच्छा थी कि मेरे बाद, समाजवादी पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथ मे हो. लेकिन इसका विरोध परिवार के अंदर से लेकर बाहर भी हो सकता था. परिवार मे सबसे बड़े विरोध का खतरा शिवपाल सिंह और पत्नी साधना से था. उस समय शिवपाल की स्थिति यह थी कि मुलायम सिंह के बाद वह पार्टी मे नंबर दो की हैसियत पर थे.
इसलिये मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी मे धीरे- धीरे अखिलेश को मजबूत करने का काम शुरू किया. इसके लिये मुलायम सिंह ने सबसे पहले खुद मुख्यमंत्री न बन कर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया. लाख विरोध के बावजूद अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री पद से नही हटाया. इसीके साथ मुलायम सिंह ने अपने सभी विश्वास पात्र नेता धीरे – धीरे अखिलेश के साथ खड़े कर दिये. मात्र चार साल के अंदर अखिलेश यादव की स्थिति समाजवादी पार्टी मे नंबर एक की हो गयी.
कहने को तो आज पार्टी मे परोक्ष रूप से कमान अखिलेश यादव के हाथ मे है. लेकिन अपरोक्ष रूप से आज भी समाजवादी पार्टी का रिमोट मुलायम सिंह यादव के हाथ मे है. क्योकि इतने अंतर्विरोधों के बाद भी परिवार का कोई भी सदस्य पार्टी से बाहर नही है. अगर एेसा न होता तो इतने उठा पटक के बाद भी शिवपाल सिंह पार्टी मे कभी न होते. सबसे बड़ी बात यह है कि आज भी अखिलेश यादव खास मसलों पर अपने पिता मुलायम सिंह यादव की सलाह जरूर लेतें हैं. इतने उतार चढ़ाव के बावजूद पिता-पुत्र के संबंध मजबूत हैं.