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जानिए क्या हैं स्पाइनल माइलोपैथी-स्पाइनल कॉर्ड

गर्दन के हिस्से में स्पाइनल कैनाल के दबाव के कारण सर्वाइकल माइलोपैथी की स्थिति पैदा होती है. सामान्य आदमी की भाषा में कहें तो इसमें गर्दन में स्थित स्पाइनल कॉर्ड का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है. इससे कॉर्ड सही ढंग से काम नहीं करती और यह परेशानी सभी उम्र के मरीजों को होती है. इस स्थिति के कई कारण है, हालाकि सबसे सामान्य कारण स्पांडीलाइसिस और रूमेटाइड आर्थराइिटस है. सामान्यतरू सर्वाइकल माइलोपैथी के कोई शुरूआती लक्षण नजर नहीं आते और लक्षण दिखते भी हैं, तो बहुत मामूली या भ्रमित करने वाले होते है. इसमें कई बार मरीज को गर्दन का दर्द बहुत आगे की स्टेज में महसूूस होता है, इससे स्थिति का पता चलना बहुत मुश्किल हो जाता है.

स्पांडीलाइसिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस के अलावा सर्वाइकल माइलोपैथी के अन्य कई कारण हैं जैसे स्लिप डिस्क, घिस रही सर्वाइकल डिस्क्स, स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर, स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव, बोन स्पर्स, गर्दन का फ्रेक्चर, सर्वाइकल स्पाइन में गंभीर चोट, ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे मल्टीपल स्केलोरिसस या न्यूरोमिलिटिस ऑप्टिका, हड्डी या पीठ की परेशानी, जन्म से ही स्पाइनल कॉर्ड का संकरापन, ऐसा कैंसर जिसमें हडिड्यां भी प्रभावित हो आदि. लक्षण सर्वाइकल माइलोपैथी के सामान्य लक्षण रोग के कारणों पर निर्भर करते है. हालाकि कुछ सामान्य लक्षण भी दिखते हैं जैसे छोटी चीजों के साथ काम करने में समस्या मसलन अपनी शर्ट के बटन बंद नहीं कर पाना, कंधे और हाथों की मांसपेशियां कमजोर पडना तथा इनमें दर्द, हैण्डराइटिंग में बदलाव और हाथों में सूनापन या झनझनाहट आदि.

अधिक गंभीर स्थिति में चलने में परेशानी, चलते हुए कई बार लडखडाना या गिर जाना या संतुलन नहीं बन पाना, अनियमित मूवमेंट आदि लक्षण सामने आते है. यही नहीं स्पाइनल कॉर्ड में दबाव की कुछ गंभीर स्थितियों में कमर के नीचे, हाथों में बिजली के झटके महसूस होते है तथा गर्दन घुमाने में परेशानी आती हैं. रोग बहुत बढने पर मरीज अक्सर अपने हाथों और पैरों में कमजोरी की शिकायत करते हैं और उनकी बाउल हैबिट भी बदल जाती है. पैथोलॉजी दबाव या संकुचन की शारीरिक क्रिया का एक कारण सर्वाइकल स्पाइन में होने वाले घिसावट के कारण होने वाला बदलाव हो सकता है. इसे सर्वाइकल स्पांडिलॉटिक माइलोपैथी कहते है. जिन मरीजों की स्पाइनल कैनाल की मोटाई पैदाइश के समय कम होती है, उनमें घिसवाट के समय स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढने की सम्भावना ज्यादा होती हैं.

कॉर्ड में दबाव का अन्य स्थिति के कारण भी आता है, जिसे ऑसीफिकेशन ऑफ पोस्टिरियर लॉंगीट्यूडनल लिगामेंट  कहते है. इस स्थिति में स्पाइनल कॉर्ड का लिगामेंट असामान्य हड्डी के साथ ज्यादा बढ़ जाता हैं और इससे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव बढ़ जाता है. जांच और उपचार सर्वाइकल माइलोपैथी की जांच और स्पाइन और आस-पास के ढांचे की स्थिति देखने के लिए कई इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं जैसे एक्सरे, एमआरई स्कैन, डाई के साथ सीटी स्कैन इसके अलावा इलेक्ट्रोमायोग्राफी , सोमाटोसेंसरी इवोक्ड पोटेन्शियल्स, विजुअल इवोक्ड पोटेंशियल टेस्ट. उपचार और सर्जरी के विकल्प सर्वाइकल माइलोपैथी के उपचार के लिए माइलोपैथी के कारण का उपचार करना जरूरी हैं. इसके आधार पर दर्द को कम या मैनेज किया जा सकता है.

मजबूती देने वाले व्यायाम भी परेशानी और दर्द को कम कर सकते है. लेकिन स्पाइनल कॉर्ड के ढांचे पर किसी तरह का दबाव सामने आता है, तो तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है ताकि चोट आगे नहीं बढ़े. गर्दन को सही करने के लिए कई तरह की सर्जरी और प्रोसीजर उपलब्ध है जैसे-डिसेक्टोमी-इस सर्जरी में स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव डाल रही डिस्क या हिस्से को हटाया जाता है. लेमिनोक्टोमी इस सर्जरी में वरब्रेटा के हिस्से लेमिन को हटाया जाता है. वरब्रेटा का संयोजन जो मरीज संतुलन नहीं बना पा रहे या गर्दन के तेज दर्द से पीडित हैं, उन्हें वरब्रेटा के संयोजन से काफी आराम मिल सकता है. सर्वाइकल संयोजन प्रोसीजर में स्क्रूऔर प्लेट की सहायता से वरब्रेटा के कारण स्पाइन कॉर्ड पर पडने वाले दबाव को कम किया जाता है.

लेमिनोप्लास्टी यह नया उपचार है, जिसमें स्पाइनल कैनाल को बिना फ्यूजन चौड़ा किया जाता है. इससे असंतुलन की जोखिम कम हो जाती है. सर्वाइकल स्पांइडालेटिक माइलोपैथी के कई मरीज लैमिनोप्लास्टी को अपना रहे हैं, हाालकि यह हर किसी के लिए सही नहीं हैं. माइक्रोस्कोप और न्यूरोमॉनिटरिंग सुरक्षित सर्जरी और अच्छे परिणाम के लिए बहुत जरूरी है. इस स्थिति में मरीजों को सर्जरी से घबराना नहीं चाहिए, अन्यथा मरीज लकवाग्रस्त और नियंत्रणहीन हो सकते हैं. न्यूरोसर्जीकल एप्रोच और दवाइयां दर्द और पीड़ा को कम करने के लिए न्यूरोसर्जीकल उपायों में फिजीकल थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी किए जा सके है.

इसके अलाावा डॉक्टर नॉनस्टोराइडल एंटी इन्फ्लेमेट्री दवाइयां, दे सकते हैं जो लक्षणों में राहत दे सके. बचाव हालांकि सर्वाइकल मैलोपैथी से बचाव मुश्किल है, लेकिन किसी भी दुर्घटना या पीड़ा से बचने के लिए सामान उठान की सही तकनीक समझना, अपने पोस्चर को सही रखना और सहीं ढंग से बैठना विशेषकर जब आप लैपटॉप पर काम कर रहे हैं जैसे उपाय किए जा सके है. इसके अलावाा पहले कभी भी डिस्क से जुडी कोई समस्या रही है तो खेल गतिविधियों से बचना, गर्दन के मूवमेंट को सीमित करना और सोते या बैठे हों तो धीरे-धीरे उठना चाहिए.

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