पश्चिम में कई सांसदों ने गंवाए टिकट जबकि विधायक बने पहली पसंद

सहारनपुर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बार के लोकसभा चुनावों में केंद्रीय मंत्री समेत कई मौजूदा सांसद अपना टिकट नहीं बचा पाए हैं जबकि आधा दर्जन सीटों पर विधायक राजनीतिक दलों की पहली पसंद बने हैं।

पहले चरण के होने वाले मतदान में 19 अप्रैल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, रामपुर, मुरादाबाद और पीलीभीत में मतदान होगा। पिछले चुनावों में भाजपा सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, रामपुर और मुरादाबाद सीटें हार गई थी जबकि 2014 के चुनावों में उसने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी।

सहारनपुर सीट पर बसपा सांसद फजर्लुरहमान कुरैशी टिकट कटने से चुनाव मैदान से बाहर हो गए हैं। यही हाल बिजनौर के बसपा सांसद मलूक नागर का है। वह भी मायावती का दिल नहीं जीत पाए और चुनाव मैदान से बाहर हो गए। इस सीट पर भाजपा-रालोद गठबंधन से मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट के युवा रालोद विधायक चंदन चौहान को रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने उम्मीदवार बनाया है। चंदन का यह पहला लोकसभा चुनाव है।

नगीना सुरक्षित सीट पर बसपा ने अपने नेहटोर सुरक्षित सीट से विधायक ओम कुमार को प्रत्याशी बनाया है। मायावती ने यहां के मौजूदा सांसद गिरिश चंद जाटव को बुलंदशहर सुरक्षित सीट पर भेज दिया है। मुरादाबाद के मौजूदा सपा सांसद डा. एस.टी. हसन को भी अखिलेश यादव ने चुनाव मैदान से बाहर कर दिया है। संभल सीट के सपा सांसद शफीकुर रहमान बर्क को अखिलेश यादव ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था लेकिन बीमारी और वृद्धावस्था के चलते उनकी मृत्यु हो गई थी। यह सीट भी विगत चुनाव में सपा ने भाजपा से छीन ली थी।

मेरठ लोकसभा सीट पर भाजपा ने अपने तीन बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काट दिया है और वह चुनाव मैदान से बाहर हो गए हैं। राजेंद्र अग्रवाल ने टिकट कटने की नाराजगी जताने के बजाए नए उम्मीदवार अरूण गोविल रामायण सीरियल में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले कलाकार का कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करके भाजपा आलाकमान का दिल जीत लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस सीट पर एक-एक कर दो दलित उम्मीदवार उतारे और 2 अप्रैल को आखिर अपने सरधना के युवा एवं तेज तर्रार विधायक अतुल चौधरी को प्रत्याशी घोषित कर दिया। अतुल चौधरी वैसे भी अखिलेश यादव की चोकड़ी में शामिल हैं और पूरी ताकत के साथ अपनी दावेदारी कर रहे थे। आखिर उन्हें अखिलेश यादव का दिल जीतनें में सफलता मिल ही गई।

गाजियाबाद लोकसभा सीट का दो बार प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह अबकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल नहीं जीत पाए और उत्तर प्रदेश की मजबूत राजपूत लाबी की पैरोकारी भी उनके काम ना आ सकी। भाजपा ने अपने स्थानीय विधायक अतुल गर्ग को जो वैश्य बिरादरी के सम्मानित नेता भी हैं, को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

इस बार के टिकट वितरण में राजनीतिक दलों ने पुरानी लीक से हटकर अपने प्रत्याशियों का चयन किया है। जिससे ज्यादातर लोकसभा क्षेत्रों में नए समीकरण बने हैं और वहां के नतीजे भी इससे प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकते हैं। प्रमाणिक राजनीतिक समीक्षकों के लिए भी इन सीटों के नतीजों का पूर्वानुमान लगाना कतई भी आसान नहीं है।