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बीसीसीआई को अब डेकन चार्जर्स को नहीं देना होगा 4800 करोड़ रुपए का हर्जाना

नयी दिल्ली, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को आईपीएल फ्रेंचाइजी डेकन चार्जर्स (अब सनराइजर्स हैदराबाद) को अब 4800 करोड़ रुपए का हर्जाना नहीं देना होगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में बुधवार को फैसला सुनाते हुए बीसीसीआई को बड़ी राहत दी है।

न्यायामूर्ति गौतम पटेल की खंडपीठ ने पंचाट के जुलाई 2020 के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें बीसीसीआई को जुर्माने के तौर पर डेकन चार्जर्स को 4800 करोड़ रुपए देने के लिए कहा गया था। बीसीसीआई ने जुलाई 2020 में इसे चुनौती दी थी। दरअसल ये पूरा मामला साल 2012 का है, जब बीसीसीआई ने डेकन चार्जर्स का आईपीएल से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया था। इसके चलते हैदराबाद से संबंधित इस फ्रेंचाइजी ने बीसीसीआई को इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती थी। इसके बाद इस मामले की जांच करने के लिए अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सीके ठक्कर को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया था।

बीसीसीआई के एक पदाधिकारी ने इस पर कहा, “ यह बीसीसीआई के लिए एक बड़ी राहत है। मध्यस्थता हर्जाना बहुत बड़ा था। यह लगभग 5000 करोड़ रुपये के करीब था। हम माननीय अदालत के आभारी हैं। ” वहीं मध्यस्थता मामले में बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले बीसीसीआई के वकील राजू सुब्रमण्यम ने कहा कि फैसला बीसीसीआई के रुख की पुष्टि करता है। मध्यस्थता हर्जाना अस्थिर था। फ्रेंचाइजी ने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया था और मुआवजे की मांग की थी। ”

उल्लेखनीय है कि अदालत में बीसीसीआई का प्रतिनिधित्व भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। अधिवक्ता सम्राट सेन, कानू अग्रवाल, इंद्रनील देशमुख, आदर्श सक्सेना, आर शाह और कार्तिक प्रसाद बीसीसीआई के अन्य अधिवक्ता थे।

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