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बुंदेलखंड के कई परिवार खा रहे घास की रोटी

हालात और गरीबी के कारण बुंदेलखंड के कई परिवार घास की रोटी खाने को मजबूर हैं।आम आदमी पार्टी में रह चुके योगेंद्र यादव ने हाल ही में बुंदेलखंड के हालात को लेकर सर्वे कराया था। रिपोर्ट में पता चला था कि बुंदेलखंड के कई परिवार घास की रोटी खाने को मजबूर हैं। योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर बुंदेलखंड की समस्या को सबसे पहले उठाया था। मुख्यमंत्री ने अफसरों की कमिटी से जांच कराकर कार्यवाही की बात कही थी.मीडिया में कुछ दिनों पहले आईं खबरों में बताया गया था बांदा के सुलखान का पुरवा गांव के किसान घास की रोटियां और जंगली फल खाने को मजबूर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट पर गौर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने हालात का जायजा लेने के लिए दो मेंबर की कमिटी बनाई थी। इसमें मशहूर सोशल एक्टिविस्ट डॉ. हर्षमंदर और डॉ. सज्जाद हसन शामिल थे। कोर्ट के कहने पर दोनों ही दो दिन पहले सुलखान का पुरवा गांव पहुंचे थे।यहां के हालात और गरीबी देख कमिटी हैरान रह गई थी। कमिटी के दोनों मेंबरों ने घास की रोटियां खाकर देखी थीं और भूख से मरने वाले सुब्हानी और गप्पू के घर भी गए थे। इस इलाके में जिस घास से रोटियां बनती हैं, उसे ‘फिकारा’ बताया जाता है।

bundelkhand

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