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स्वदेश वापसी के लिए 85 वर्षीय पाकिस्तानी ने िलया अदालत का सहारा

DHC_New-4नई दिल्ली,  हेरोइन की तस्करी करने के षड्यंत्र के लिए 12 वर्ष की जेल की सजा काटने के बाद आठ महीने से अधिक समय से यहां के एक हिरासत केंद्र में रह रहे 85 वर्षीय एक पाकिस्तानी नागरिक ने स्वयं को स्वदेश भेजने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

लाहौर निवासी मोहम्मद हनीफ की स्वदेश भेजने की मांग वाली अर्जी न्यायमूर्ति ए के पाठक के समक्ष आयी जिन्होंने इस पर केंद्र और दिल्ली सरकार से दो फरवरी से पहले जवाब मांगा है। मोहम्मद हनीफ ने दलील दी है कि सजा काटने के बाद उसे गत वर्ष छह अप्रैल से यहां नरेला के लामपुर स्थित हिरासत केंद्र में बेवजह रखा गया है। उसने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी उच्चायोग ने स्वदेश भेजने के लिए उसके नाम को मंजूरी दे दी है। अदालत ने कहा, प्रतिवादियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। केंद्र सरकार के स्थायी वकील प्रतिवादी नम्बर एक (गृह मंत्रालय) के लिए नोटिस स्वीकार करें और अतिरिक्त स्थायी वकील प्रतिवादी नम्बर दो (दिल्ली सरकार) के लिए नोटिस स्वीकार करें और स्थिति रिपोर्ट दायर करने के लिए समय मांगें। अदालत ने कहा, इसे तीन सप्ताह के भीतर दायर किया जाए। मामले को दो फरवरी, 2017 के लिए सूचीबद्ध करें। मोहम्मद हनीफ को राजस्व खुफिया निदेशालय ने वर्ष 1996 में मादक पदार्थ तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था और उसे बाद में अक्तूबर 2001 में निचली अदालत और बाद में एजेंसी द्वारा अपील दायर करने पर मार्च 2016 में उच्च न्यायालय ने भी बरी कर दिया। इस बीच सितम्बर 2003 में उसे मादक पदार्थ तस्करी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया और निचली अदालत ने अप्रैल 2011 में उसे 20 वर्ष की सजा सुनायी। यद्यपि उसकी अपील पर उच्च न्यायालय ने उसकी सजा स्वदेश भेजने की उसकी अर्जी के आधार पर घटाकर 12 वर्ष कर दी।

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