अखिलेश यादव की रैली में शामिल होने के लिये वाहनो के काफिले से दादरी गुलजार

अमरोहा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार तड़के से ‘अखिलेश यादव ज़िंदाबाद’ के नारों के बीच गौतमबुद्ध नगर के दादरी में आयोजित रैली में शामिल होने के लिए लोगों का काफिला लगातार गुजरता रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, हसनपुर, चांदपुर और गजरौला समेत कई क्षेत्रों से गुर्जर समाज के लोगों का रैली में पहुंचने का सिलसिला सुबह से जारी रहा। समाजवादी पार्टी (सपा) के अनुसार, दादरी के मिहिर भोज कॉलेज मैदान में आयोजित “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव संबोधित करेंगे। पार्टी इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत के रूप में देख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली पश्चिमी यूपी की बदलती जातीय राजनीति का संकेत है, जहां सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ गुर्जर समाज को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जहां धार्मिक ध्रुवीकरण प्रमुख रहा, वहीं अब चुनाव से पहले जातीय समीकरण फिर केंद्र में आते दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गुर्जर समुदाय पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 140 विधानसभा सीटों पर प्रभावशाली माना जाता है और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। सपा इस समुदाय में कथित नाराजगी को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का दावा है कि वर्तमान सरकार में गुर्जर समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
दादरी रैली को सपा के संभावित नए सामाजिक गठबंधन की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। यदि रैली में अपेक्षित भीड़ जुटती है, तो यह पश्चिमी यूपी में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का संकेत हो सकता है। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अंतिम परिणाम भीड़, समुदाय की एकजुटता और अन्य दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।





