आलू की बर्बादी के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार: आप

फर्रुखाबाद, आम आदमी पार्टी (आप) के जिला अध्यक्ष नीरज प्रताप शाक्य ने एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी माने जाने वाले फर्रुखाबाद में किसानों के आलू की बर्बादी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। श्री शाक्य मंगलवार को सातनपुर कृषि उत्पादन मंडी समिति में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में आलू से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण जाम की स्थिति बनी हुई थी। उन्होंने किसानों से उनकी समस्याएं सुनीं और कहा कि मंडी में खरीदार न होने के कारण किसानों का आलू सड़ने लगा है और उन्हें मजबूरी में औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है।

किसानों ने बताया कि कई दिनों से उनकी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आलू से लदी खड़ी हैं, लेकिन खरीददार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में आलू खराब होने लगा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ही करीब 500 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आलू लेकर किसान वापस अपने गांव लौट गए।
इस दौरान श्री शाक्य ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “आलू ले लो आलू, 1500 रुपये में लगभग 50 कुंतल की एक ट्रॉली आलू बिक रहा है, लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधि कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर किसानों की फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने सरकार से आलू किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की।

इधर जिला आलू एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी पुरुषोत्तम वर्मा ने बताया कि सातनपुर मंडी में बाहर से आने वाले बड़े व्यापारी होली के कारण चले गए हैं। होली के बाद इन व्यापारियों ने आगरा मंडी से आलू खरीदना शुरू कर दिया है, जिसका असर फर्रुखाबाद मंडी पर पड़ा है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार को मंडी में करीब 180 मोटर आलू की आवक हुई। मंडी में आलू के भाव 201 से 301 रुपये प्रति कुंतल (नवल चेचक), 301 से 401 रुपये (गड्ड व सामान्य छंटा), 401 से 451 रुपये (सुपर छंटा), 551 से 651 रुपये (हॉलैंड) और 651 से 751 रुपये प्रति कुंतल तक रहे।

श्री वर्मा ने कहा कि पिछले दो दिनों से तेज गर्मी और धूप के कारण खुदाई के समय आलू दागी और डैमेज हो गया है। मंडी में करीब 60 प्रतिशत दागी आलू आने से खरीदार उसे कम दामों में खरीद रहे हैं, जिससे किसानों की स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने किसानों और आढ़तियों से अपील की कि वे आलू को छाया में रखकर धीरे-धीरे बिक्री करें और हड़बड़ी में औने-पौने दामों पर फसल न बेचें।

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