उत्तर प्रदेश में ‘आनंदम’ कार्यक्रम से बदलेगा स्कूली शिक्षा का स्वरूप
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह द्वारा शुरु किए गए ”आनंदम कार्यक्रम” के तहत कक्षा 6, 7 और 8 के लिए प्रत्येक शैक्षिक सत्र में 10 बैगलेस दिवस अनिवार्य किए गए हैं। इन दिनों बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से वास्तविक जीवन, स्थानीय संस्कृति और कौशल से जुड़ाव स्थापित करेंगे।
उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, अनुभवात्मक और कौशल आधारित बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा तैयार ”आनंदम मार्गदर्शिका” के आधार पर प्रदेश के सभी जिलों के बीएसए को निर्देश जारी किए गए हैं। यह कार्यक्रम शिक्षा को पाठ्यपुस्तक आधारित सीमाओं से बाहर निकालकर उसे सीखने के आनंद, प्रयोग, अवलोकन और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने पर केंद्रित है।
श्री संदीप सिंह ने कहा कि आनंदम कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य के लिए आवश्यक कौशल जैसे अवलोकन, तर्क, विश्लेषण, रचनात्मकता, सहयोग और संप्रेषण से जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें ”वोकल फॉर लोकल” की अवधारणा से जोड़ना है। स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और उद्योगों से संवाद के माध्यम से बच्चों में श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता की भावना का विकास होगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि आनंदम कार्यक्रम बच्चों में रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करेगा। समुदाय और स्कूल के बीच बेहतर साझेदारी तथा बच्चों का व्यवहारिक ज्ञान भविष्य की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बैगलेस दिनों में विद्यार्थी शैक्षिक भ्रमण, प्रयोग, स्थानीय उद्योगों का अवलोकन, कला-शिल्प, प्राकृतिक अन्वेषण, खेल, सामुदायिक सहभागिता, और वैज्ञानिक गतिविधियों जैसी विविध गतिविधियों में भाग लेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार बच्चे केस स्टडी भी करेंगे, जो सीखने की एक उन्नत प्रक्रिया है। इससे वे केवल किताबों तक सीमित न रहते हुए वास्तविक परिस्थितियों को समझना, उनका विश्लेषण करना और समस्याओं का समाधान ढूंढना सीखेंगे।
एससीईआरटी के निदेशक डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम के लिए गतिविधियों की सूची को तीन प्रमुख श्रेणियों विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्थानीय उद्योग व व्यवसाय, कला, संस्कृति और इतिहास में विभाजित किया गया है। स्कूल इन गतिविधियों में आवश्यकतानुसार स्थानीय विशेषज्ञों, कारीगरों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों को भी शामिल करेंगे। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी गतिविधियों का भी प्रावधान किया गया है।





