एड्स उन्मूलन में अब एचआईवी मरीज निभाएंगे नेतृत्वकारी भूमिका

लखनऊ, एड्स उन्मूलन की दिशा में अब रणनीति में बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिसमें एचआईवी से प्रभावित लोगों को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि इस लड़ाई का केंद्र बनाया जा रहा है।

इस बावत मंगलवार को लखनऊ में जीआईपीए (ग्रेटर इन्वॉल्वमेंट ऑफ पीपल लिविंग विथ एचआईवी/एड्स) सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें समावेशी देखभाल और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएमएलआईएमएस के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने कहा कि एचआईवी मरीजों की भागीदारी नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और निगरानी तक सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जीआईपीए की अवधारणा इसी सोच पर आधारित है कि प्रभावित लोग इस लड़ाई के बराबर के भागीदार हैं।

यूपीसैक्स के संयुक्त निदेशक रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में कम्युनिटी सिस्टम स्ट्रेंथनिंग ग्रुप (सीएसएसजी) गठित किए गए हैं, जो जिला स्तर पर सामुदायिक फीडबैक के आधार पर योजनाओं में सुधार सुनिश्चित करेंगे। वहीं, डॉ. संजय सोलंकी ने कहा कि इलाज उपलब्ध होने के बावजूद सामाजिक कलंक अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे समाज की सहभागिता से ही दूर किया जा सकता है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष कुमार ने एचआईवी प्रभावित लोगों के लिए उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दी। साथ ही सामाजिक कल्याण, श्रम और महिला एवं बाल विकास विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

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