एसआईआर के नाम पर लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला: संजय सिंह

लखनऊ, आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर लोकतंत्र पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया गया है।

संजय सिंह ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी की मिलीभगत से प्रदेश में दो करोड़ 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काट दिए गये और इस तरह से यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा ‘वोट घोटाला’ बन गया है।

उन्होंने कहा कि यह कोई चुनाव सुधार नहीं, बल्कि गरीबों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और मजदूर वर्ग को मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने बताया कि दिसंबर माह में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ग्रामीण मतदाता सूची में 12 करोड़ 70 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि छह जनवरी को एसआईआर के बाद जारी नई सूची में पूरे उत्तर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर केवल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता दर्शाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिसंबर में सिर्फ ग्रामीण मतदाता ही 12.70 करोड़ थे, तो अब शहरी मतदाता जोड़ने के बाद संख्या कैसे घट गयी।

आप सांसद ने आरोप लगाया कि मनमाने तरीके से अलग-अलग श्रेणियां बनाकर वोट काटे गए। करीब 25 लाख मतदाताओं को दो जगह नाम होने का बहाना बनाकर हटाया गया, 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ या ‘अनट्रेसेबल’ घोषित कर दिया गया और 45–46 लाख लोगों को मृत बताया गया। इसके अलावा 84 लाख मतदाताओं के नाम यह कहकर हटा दिए गए कि वे घर पर नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएलओ पर ऊपर से दबाव डालकर यह कार्रवाई कराई गई।

उन्होंने कहा कि ‘शिफ्टेड’ दिखाए गए लाखों लोग रोज़गार के लिए दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में काम करने गए हैं। सवाल यह है कि अगर वे न वहां मतदाता हैं और न उत्तर प्रदेश में, तो उनका वोट कहां गया? क्या प्रवासी मजदूरों को लोकतंत्र से बाहर कर दिया जाएगा?

उन्होंने एक महीने में नाम जुड़वाने के लिए 13 प्रकार के दस्तावेज मांगे जाने को ‘गरीब विरोधी तुगलकी फरमान’ बताया। उन्होंने कहा कि एक अनपढ़ मजदूर हाईस्कूल प्रमाणपत्र, पासपोर्ट या जमीन के कागज कहां से लाएगा। यह शर्तें जानबूझकर इसलिए रखी गई हैं ताकि गरीब वर्ग अपने नाम वापस न जुड़वा सके।

आप सांसद ने एसआईआर को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ऐसा व्यापक पुनरीक्षण कराने का अधिकार ही नहीं है। एक ही सरकारी मशीनरी द्वारा तैयार की गई सूचियों में इतना बड़ा अंतर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी ने अब तक करीब 6,000 बीएलओ तैयार कर लिए हैं और इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। अंत में उन्होंने जनता से अपील की कि अपने मताधिकार की रक्षा के लिए नाम जांचें और जरूरत पड़ने पर तुरंत जुड़वाएं, क्योंकि वोट का अधिकार बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की देन है, जिसे किसी भी कीमत पर छीने जाने नहीं दिया जाएगा।

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