काशी में मौनी अमावस्या पर गंगा घाटों पर उमड़ा जनसैलाब

वाराणसी, धार्मिक नगरी काशी में मौनी अमावस्या के अवसर पर रविवार की भोर से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। इस पावन दिन पवित्र नदियों में मौन रहकर स्नान करने, दान-पुण्य करने तथा भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
बटुक भैरव मंदिर के महंत एवं ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी ने बताया कि गंगा तट पर रहने वाले व्यक्ति चाहे वह प्रयागराज हो, काशी हो या हरिद्वार,को आज मौन व्रत रखकर स्नान अवश्य करना चाहिए। इस दिन स्नान करने से दैहिक (शारीरिक), भौतिक (अनजाने में किए गए पाप) तथा (ग्रह-गोचर जनित दोष) तीनों प्रकार के पाप दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर स्वर्ग लोक के समस्त देवी-देवता गंगा में वास करते हैं और भक्तों को उनके पापों से मुक्ति प्रदान करते हैं।
काशी के दशाश्वमेध, शीतला, राजेंद्र प्रसाद, दरभंगा, शिवाला, राणा महल, अस्सी, भदैनी, रविदास, राजघाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालु माँ गंगा में पुण्य स्नान कर रहे हैं। अनुमान है कि आज चार लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान करेंगे।
मौनी अमावस्या शनिवार रात 11:38 बजे से शुरू होकर रविवार रात 12:57 बजे तक रहेगी। 18 जनवरी को पूरे दिन पुण्य स्नान किया जा सकता है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोदौलिया से मैदागिन तथा दशाश्वमेध मार्ग को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया है। विश्वनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
तीर्थ पुरोहित राजू तिवारी ने बताया कि इस दिन मौन रहकर प्रभु का ध्यान करते हुए मात्र स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। पवित्र संगम तट पर देवताओं का वास होता है। इस दिन स्नान से तन की शुद्धि, मौन से मन की शुद्धि तथा दान से धन की शुद्धि एवं वृद्धि होती है।





