डिजिटल अरेस्ट कर करोड़ों की ठगी मामले में असम, जम्मू और पंजाब से तीन गिरफ्तार

रतलाम, डिजिटल अरेस्ट करके मध्यप्रदेश के रतलाम के एक वृद्ध दंपति से सवा करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में पुलिस ने असम, जम्मू और पंजाब से तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस मामले में पुलिस पहले से नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रकरण में फ्रीज कराए गए ग्यारह लाख रु. भी पुलिस ने दंपति को वापस दिलवा दिए है।
रतलाम के एक दंपति को 15 नवंबर 2025 से 12 दिसम्बर 2025 तक एक सुसंगठित गिरोह ने डिजिटल अरेस्ट कर उनसे एक करोड 34 लाख पचास हजार रु. की राशि छल व भय दिखाकर प्राप्त कर ली गई थी। पीड़ित पक्ष ने इसकी रिपोर्ट दीनदयाल नगर थाने पर की थी। पुलिस ने इस मामले में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था।
पुलिस के मुताबिक 15 नवम्बर को फरियादी को अज्ञात कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉलर ने स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर फरियादी को मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फँसाने का भय दिखाया। आरोपियों द्वारा फर्जी डिजिटल जांच एवं अदालत जैसा दृश्य दिखाकर सिग्नल एप के माध्यम से वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति बनाकर आधार, बैंक व निजी दस्तावेज प्राप्त कर एक महीने के बीच ये ठगी की।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस मामले की जाँच के लिए एसपी अमित कुमार ने 18 सदस्यीय एसआईटी गठित की।एसआईटी ने अब तक इस प्रकरण में जबलपुर, नीमच, उत्तर प्रदेश एवं गुजरात से कुल 09 आरोपी गिरफ्तार कर ठगी की राशि को विभिन्न बैंक खातों व क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित किया जाना उजागर करते हुए संगठित साइबर अपराध पाए जाने पर धारा 111 बीएनएस भी जोड़ दी थी ।
डिजिटल अरेस्ट के इस गंभीर मामले की अग्रिम विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्य, बैंक ट्रेल, कॉल डिटेल एवं पूर्व गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर 03 अन्य महत्वपूर्ण आरोपियों की संलिप्तता सामने आई, जिन्हें अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस टीम ने पंजाब से मोहन काबरा,जम्मू से सुमिरन शर्मा और असम से सुरेश को गिरफ्तार किया है।
आरोपी मोहन ने पूर्व में गिरफ्तार आरोपी अमरेंद्र के साथ मिलकर उसके नाम से बैंक खाते खुलवाए और उनका उपयोग ठगी की राशि के ट्रांजैक्शन में किया। आरोपी अमरेंद्र कमीशन पर खाता मोहन को देने के लिए सुरेश के साथ गुवाहाटी गया था। मोहन ने अमरेंद्र को कमीशन का लालच देकर उसके खाते का उपयोग फ्रॉड में किया। मोहन द्वारा अमरेंद्र व अन्य खातों के माध्यम से लगभग दो करोड़ के फ्रॉड ट्रांजैक्शन कराए गए। महिला आरोपी सुमिरन ने पूर्व गिरफ्तार आरोपी शानू के साथ मिलकर ठगी की राशि को अपने खाते से आगे ट्रांसफर किया। महिला आरोपी सिमरन टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से एपीके फाइल भेज कर अकाउंट का एक्सेस लेकर फ्रॉड करती थी।
इन तीनों आरोपियों की भूमिका से यह स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित, अंतरराज्यीय एवं तकनीकी रूप से संचालित साइबर गिरोह है। तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण में आगे की विवेचना जारी है एवं अन्य फरार आरोपियों की तलाश हेतु पुलिस टीमें विभिन्न राज्यों में सक्रिय हैं।





