नई दिल्ली, कावेरी जल विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा कि आप जलसंग्रह के लिए बांध का उपयोग क्यों नहीं करते हैं ताकि उस पानी का इस्तेमाल संकट के समय किया जा सके। जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने तमिलनाडु सरकार से पूछा कि आप वाटर हार्वेस्टिंग मैकेनिज्म पर काम क्यों नहीं करते हैं। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा कि पानी बचाने पर आपका क्या प्लान है।
पिछले 5 जुलाई को तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2016 के आदेश के मुताबिक छह टीएमसी फीट पानी नहीं दिया है। इस मामले को मेंशन करने के बाद जस्टिस दीपक मिश्रा ने तमिलनाडु के वकील से कहा कि वे इस संबंध में पर्याप्त याचिका दाखिल करें। वे इस पर सुनवाई करेंगे। इससे पहले 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में संशोधन करने की याचिका खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कर्नाटक तमिलनाडु को छह हजार क्यूसेक पानी दे। कर्नाटक की दलील थी कि ये आदेश पिछले साल बीस से तीस सितंबर तक के लिए था जो समय अब खत्म हो गया है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में संशोधन करे।
पिछले साल 18 अक्टूबर को सुप्रम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को निर्दश दिया था कि वो तमिलनाडु को प्रतिदिन दो हजार क्युसेक पानी छोड़े। उसके पहले एक अक्टूबर को कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था और मांग की थी कि केंद्र कावेरी वाटर मैनेजमेंट बोर्ड का गठन करे।