दलित, आदिवासियों के लिए बजट में भारी कटौती और योजना पर सिर्फ 41 प्रतिशत खर्च : राजेंद्र पाल गौतम

नयी दिल्ली, कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी) विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम ने मंगलवार को केंद्र सरकार के आम बजट पर गंभीर सवाल उठाते हुये कहा कि संसद में बजट सत्र चल रहा है और केंद्र सरकार ने करीब 58 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है लेकिन इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है।
राजेंद्र पाल गौतम ने आज यहां प्रैस वार्ता में कहा कि आम बजट में अनुसूचित वर्ग के लिए 1,96,400 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 1,41,089 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों के बजट विश्लेषण से सामने आया है कि एससी – एसटी वर्ग के लिए कुल बजट का सिर्फ 41 प्रतिशत ही लक्षित योजनाओं पर खर्च होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “दिखाओ कुछ, करो कुछ” की नीति पर काम कर रही है और भाजपा इस काम में माहिर है।
उन्होंने बताया कि 2020-21 से 2024-25 तक एससी- एसटी वर्ग के लिए आवंटित बजट लगातार घटता रहा, न तो इस पर कोई प्रभावी चेक-बैलेंस रहा और अंत में वित्तीय वर्ष के अंत में आवंटित धनराशि का उपयोग न होने पर उसे सरकार को वापस कर दिया जाता है। नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2025-26 के बजट में 130 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसमें 106 छात्रों का चयन हुआ, लेकिन फंड की कमी के कारण सिर्फ 40 छात्र ही विदेश जाकर पढ़ाई कर पाए, जबकि 66 चयनित छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह गए।
राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र सरकार से मांग की अनुसूचित जाति घटक योजना पर अलग से कानून बनाया जाए, एससी- एसटी बजट के डायवर्जन को रोकने के लिए केंद्रीय कानून लाई जाए और एससी- एसटी से जुड़ी लक्षित योजना का बजट बढ़ाया जाए, ताकि इन वर्गों के बच्चे शिक्षा के ज़रिए आगे बढ़ सकें।
उन्होंने कहा कि जब तक कानूनन सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के साथ बजट में भेदभाव जारी रहेगा।





