निजी स्कूलों की नहीं चलेगी मनमानी,दो महीने पहले सार्वजनिक करनी होगी स्कूल फीस

कानपुर, स्ववित्तपोषित विद्यालयों में फीस, किताब-कॉपी, जूते-मोजे और यूनिफॉर्म को लेकर अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के बीच कानपुर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश-2018 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त वसूली गई फीस वापस कराने के साथ भारी अर्थदंड और बार-बार उल्लंघन पर मान्यता समाप्त कराने तक की संस्तुति की जाएगी।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गये कि अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और फीस से जुड़े सभी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि फीस निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और कोई भी विद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक एक भी रुपया नहीं लेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यालय शैक्षिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व आगामी वर्ष में ली जाने वाली फीस का विवरण अनिवार्य रूप से सक्षम अधिकारी को उपलब्ध कराए और प्रवेश प्रारंभ होने से साठ दिन पूर्व अपनी वेबसाइट तथा सूचना पट्ट पर इसे सार्वजनिक करे।
उन्होने यह भी निर्देशित किया कि किसी भी छात्र या अभिभावक को किताब, जूते, मोजे अथवा यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाना गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। यदि इस प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो बिना किसी ढिलाई के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बार निर्धारित यूनिफॉर्म को कम से कम पांच वर्षों तक नहीं बदला जाएगा।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रवेश शुल्क केवल पहली बार नए प्रवेश के समय ही लिया जाएगा तथा परीक्षा शुल्क सिर्फ परीक्षाओं के लिए ही वसूला जाएगा। विद्यालय द्वारा ली जाने वाली प्रत्येक फीस की रसीद देना अनिवार्य होगा और निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।
शिकायत निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि छात्र या अभिभावक की शिकायत का समाधान पहले विद्यालय स्तर पर तय समय में कराया जाए। पंद्रह दिन में समाधान न होने की स्थिति में मामला सीधे जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई विद्यालय नियमों से अधिक शुल्क वसूलने या किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए विवश करता पाया गया, तो पहली बार उल्लंघन पर अतिरिक्त वसूली गई फीस वापस कराने के साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर यह जुर्माना पांच लाख रुपये तक होगा और तीसरी बार उल्लंघन की स्थिति में संबंधित बोर्ड से मान्यता अथवा सम्बद्धता समाप्त कराने की संस्तुति की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती दीक्षा जैन, जिला विद्यालय निरीक्षक संतोष कुमार राय, चार्टर्ड एकाउंटेंट सुधीर चौधरी, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग अनिल कुमार, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) शिशिर जायसवाल, आर.के. मिशन हाई सेकेंडरी स्कूल आर.के. नगर के प्रधानाचार्य पंकज शुक्ला, सीबीएसई बोर्ड के को-ऑर्डिनेटर बलविंदर सिंह, आईसीएसई बोर्ड की को-ऑर्डिनेटर शर्मिला नंदी तथा अभिभावक संघ डीपीएस इंटर कॉलेज नवाबगंज के प्रतिनिधि मनोज कुमार उपस्थित रहे।




