
भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद हाईकोर्ट करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को कतई मंजूर नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों से आने वाले वादकारी परेशान हैं। हड़ताल से हजारों की संख्या में मुकदमों की संख्या में सुनवाई नहीं हो सकी। पूरे दिन वकीलों ने सुंदरकांड का पाठ किया। यह कहकर हनुमान चालीसा का पाठ किया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को सदबुद्धि आए। हाईकोर्ट बार के ऐलान पर कैट के वकील भी हड़ताल पर चले गए है जिससे वहां भी कामकाज ठप हो गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि वह झुकेंगे नहीं। हड़ताल पूरी तरह जारी रहेगी। जब तक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला वापस नहीं लेता इस मामले पर वार्तालाप नहीं होगी। वकीलों का कहना था कि भ्रष्टाचार का सामना कर रहे न्यायाधीश को उनके पैतृक न्यायालय में भेजने का निर्णय उन्हें पुरस्कृत करने जैसा है न/न कि दंड देना है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की गरिमा पर कुठाराघात के प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। इससे मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
हाईकोर्ट बार कार्यकारिणी की दिन में फिर बैठक हुई जिसमें हाईकोर्ट के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर वकीलों को रोकने के लिए टीमें गठित की गई। इन टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई कि सुबह नौ बजे से गेट पर रहकर अधिवक्ताओं को न्यायालय में जाने से रोकेंगे और उसके बाद न्यायालयों में जाकर न्यायाधीशों से काम नहीं करने का अनुरोध करेंगे। हाईकोर्ट बार ने न्यायाधीशों से भी उनकी हड़ताल में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
आमसभा का संचालन कर रहे कैट बार के महासचिव जितेंद्र नायक ने बताया कि आम सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ कोर्ट से ही संबंधित नहीं है बल्कि आम जनमानस से जुड़ा है इस घटनाक्रम से भारतीय जनता का न्यायपालिका से विश्वास उठा है। सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए और कॉलिजियम सिस्टम में सुधार करना चाहिए।