लखनऊ, अपने सौ दिन पूरे करने पर, योगी सरकार ने पिछले साल के मुकाबले अपराध के ग्राफ में गिरावट का दावा किया है. जोकि योगी सरकार का सफेद झूठ है. हकीकत यह है कि यूपी मे अपराध कम नही ज्यादा हुये हैं.
इन दावों पर दम भरते हुए योगी सरकार पूरे जोश में नजर आई लेकिन सूबे की पुलिस की ओर से जारी किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो सरकार के इन दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आई. योगी सरकार ने आंकड़े जारी कर एकबार फिर जनता को अपनी नाकामी छुपाने के ळिये बरगलाने का कआम किया है.
यूपी मे योगी सरकार आते ही जनता को भरोसा हो गया था कि अब प्रदेश में अपराध का खात्मा निश्चित रूप से होकर रहेगा. क्योंकि योगी सरकार भयमुक्त शासन का नारा देकर ही सत्ता मे आयी थी. लेकिन योगी सरकार कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बुरी तरह फेल रही.
योगी सरकार के अनुसार, पिछली सरकार के इन्हीं सौ दिनों और योगीराज के इन सौ दिनों में हत्या में 4.43 फीसदी, दहेज हत्या में 6.68 फीसदी, सड़क पर अपराध में 100 फीसदी की गिरावट आई है. इसके अलावा एससीएसटी क्राइम में भी 12.43 फीसदी की गिरावट आई है. जबकि हकीकत यह है कि योगी सरकार ने उन बड़े अपराधों की बात ही नही की है जिसमे पिछले 100 दिनों मे बेतहाशा वृद्धि हुटी है. उसने लूट, डकैती, फिरौती के लिए अपहरण और रेप जैसे अपराधों की तो बात ही नही की है.
यूपी मे क्राइम रेट पिछले आंकड़ों को पूरी तरह से पार करते हुए तहस-नहस कर चुका है. यूपी पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से 15 जून तक इन तीन महीनों में डकैती के मामले 13.85 फीसदी, लूट 20.46 फीसदी, फिरौती के लिए किए गए अपहरण 44.44 फीसदी और बलात्कार के मामलों में 40.83 फीसदी का इजाफा हुआ है. 15 मार्च से 15 जून के बीच संगीन वारदातों की फेहरिस्त में शायद ही कोई कमी आई हो.