पास्को अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को लैंगिक अपराधों से बचाना: जिला जज

देवरिया, उत्तर प्रदेश के देवरिया में शनिवार को पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत “सपोर्ट पर्सन” की सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आयोजित त्रैमासिक बैठक में जिला जज धनेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करना है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के क्रम में जनपद न्यायालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित इस बैठक का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अध्यक्षता करते हुए जिला जज श्री सिंह ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन उत्पीड़न, शोषण और अन्य लैंगिक अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में बच्चों के हितों की रक्षा करना आवश्यक है। इसके लिए रिपोर्टिंग, साक्ष्य संकलन, जांच और विशेष न्यायालयों के माध्यम से त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने न्यायपालिका और प्रशासन से बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो) बीरेन्द्र सिंह ने अधिनियम के प्रावधानों, प्रक्रियाओं और सपोर्ट पर्सन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों, कमियों और बेहतर प्रथाओं के साथ ही हितधारकों की जिम्मेदारियों की जानकारी दी।

संचालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शैलजा मिश्रा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी विभागों का समन्वित, संवेदनशील और उत्तरदायी दृष्टिकोण जरूरी है। इस दौरान प्रतिभागियों को पॉक्सो अधिनियम 2012 के तहत जांच प्रक्रिया, बाल पीड़ितों के साथ व्यवहार, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन कार्यवाही से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

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