पुलिस सेवा में चयन-सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व की बड़ी जिम्मेदारी

लखनऊ, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश (डीजीपी) राजीव कृष्ण से बुधवार को पुलिस मुख्यालय में आधारभूत प्रशिक्षण के अंतर्गत भ्रमण पर आए प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के 92वें बैच के 12 प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों ने शिष्टाचार भेंट की। इन 12 प्रशिक्षुओं में 6 महिला एवं 6 पुरुष अधिकारी शामिल हैं। शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार 6 प्रशिक्षु परास्नातक (2 एमएससी, 4 एमए) तथा 6 स्नातक (1 बीटेक, 3 बीएससी, 1 एलएलबी, 1 बीए) हैं।
पुलिस महानिदेशक ने सभी प्रशिक्षुओं को विश्व के सबसे बड़े पुलिस बल का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में चयन केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व की बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पुलिसिंग अत्यंत चुनौतीपूर्ण दायित्व है और समय के साथ इसकी प्रकृति अधिक जटिल हुई है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विधिक ज्ञान, साइबर अपराध, डिजिटल व फॉरेंसिक साक्ष्य, सूचना प्रौद्योगिकी तथा पारंपरिक साक्ष्य संकलन की गहन समझ अनिवार्य हो गई है।
डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण काल ही सेवा जीवन की नींव है। पुलिस सेवा में कई बार त्वरित और कठिन निर्णय लेने होते हैं, जहाँ अधिकारी का आत्मविश्वास और ज्ञान ही उसका सबसे बड़ा सहारा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग केवल नौकरी नहीं, बल्कि “वे आफ लाइफ” है, जिसमें उच्च आचरण, जवाबदेही और प्रोफेशनलिज्म आवश्यक है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को पीड़ितों के प्रति सहानुभूति, विनम्रता, निष्पक्षता और प्रभावी समस्या समाधान को अपने व्यवहार में शामिल करने की सलाह दी। उनका कहना था कि एक सफल अधिकारी वही है, जो जनता की अपेक्षाओं को समझकर संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्य करे।
भेंट के अंत में पुलिस महानिदेशक ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। तत्पश्चात पुलिस अकादमी की ओर से प्रशिक्षु उपाधीक्षकों द्वारा डीजीपी को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।





