नई दिल्ली, पत्रकारिता से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शनिवार को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पत्रकारिता जगत के दिग्गज इकट्ठा हुए. मीडिया पर हुए हमलों, मानहानि जैसे मामलों में जेल की सजा, रिपोर्टर की भीड़ द्वारा पिटाई आदि तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
‘द सिटीजन’ की एडिटर इन चीफ सीमा मुस्तफा ने कहा ने कहा कि असहमति ऐसी चीज है जिसे लेकर सत्तावादी प्रवृत्ति वाली सरकारों ने हमेशा निशाना बनाया है. लेकिन हमारी ताकत उन लोगों से आती है जिनकी और जिनके लिए हम आवाज उठाते हैं, न कि प्रबंधन या सरकार से.
एनडीटीवी के सीनियर एक्जीक्यूटिव एडिटर रवीश कुमार ने कहा कि इसके लिए किसी सरकारी व्यक्ति की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि मीडिया का वह वर्ग जो सरकार का गुणगान कर रहा है, केवल वही सुरक्षित है. यहां तक कि मेरा पड़ोसी मुझे मारने आ सकता है. यह ऐसी संस्कृति है जिसे बढ़ावा दिया जा रहा है.
बैठक में कुछ ऐसे टीवी चैनलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया जो एक खास समुदाय के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार करते रहते हैं. पत्रकारों ने नियामकों को और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने पर बल दिया. सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि आज मीडिया का एक बड़ा तबका ध्रुवीकरण को लगातार हवा दे रहा है. अगर समाज के ध्रुवीकरण के लिए एक संपादक जानबूझ कर मनगढंत जानकारियां पेश कर रहा तो उसे उसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
कर्नाटक विधानसभा ने जाने-माने पत्रकार रवि बेलागेरे समेत दो कन्नड़ टैबलॉयड के संपादकों को राज्य के विधायकों के खिलाफ कथित मानहानिकारक लेख लिखकर विशेषाधिकार हनन करने के लिये उन्हें एक साल के कारावास की सजा सुनाई है.
प्रेस क्लब में हुई बैठक मे वक्ताओं ने महसूस किया कि पत्रकारों को मानहानि जैसे मामलों में जेल की सजा विधानसभा के विशेषाधिकारों का दुरुपयोग है. उचित यह होता कि अगर आलेख मानहानिकारक हैं, तो वह उन पत्रकारों के खिलाफ नागरिक मानहानि का केस दर्ज करा सकते थे.