बीएलओ की आत्महत्या पर शिक्षक महासंघ चिंतित

अमरोहा, उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची संशोधन में कार्यरत बीएलओ द्वारा आत्महत्या के मामले बढ़ने पर राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ ने चिंता जताई है।
टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव यशपाल सिंह ने रविवार को कहा कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (एसआईआर)का निर्धारित लक्ष्य,किसी बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) की जान की कीमत से ऊपर नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार व उच्चाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना ज़रूरी हो जाता है कि कहीं कोई बीएलओ अपनी जान दांव पर लगा कर टारगेट तो पूरा न कर रहा है।
शिक्षक नेता यशपाल सिंह ने बतौर बीएलओ मुरादाबाद के शिक्षक सर्वेश सिंह (40) द्वारा रविवार को आत्महत्या मामले में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उचित विश्राम और चिकित्सा सुविधा के बगैर उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए लक्ष्य को प्राप्त करने के दबाव के चलते तनाव की वजह से बीएलओ की ड्यूटी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि बीएलओ के रूप में शिक्षक/कर्मचारी अत्यधिक दबाव की वजह से मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। जिससे लगातार आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और उच्चाधिकारियों को तुरंत कार्यभार में कटौती, दो या तीन बीएलओ की एक साथ तैनाती की जाए ताकि काम का बंटवारा होने से अतिरिक्त दबाव कम हो सके। मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने, तनाव प्रबंधन और काउंसलिंग प्रशिक्षण सत्र, विशेष निगरानी में स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए जाएं।
सभी बीएलओ के फिल्ड में जाने से पहले रक्तचाप चैकअप, शुगर, ईसीजी यदि अनिवार्य हो, मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने चाहिए। प्रत्येक जिले में 24*7 मेडिकल हेल्पलाइन और एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ड्यूटी के दौरान आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में शहीद की श्रेणी में रखकर सभी सुविधाएं तथा तुरंत 50 लाख रुपये तक का अनुग्रह अनुदान , बीएलओ की नियुक्ति स्वैच्छिक आधार पर हो जबरन नहीं। इन सुझावों को यदि तुरंत लागू किए जाने से कई कीमती जिंदगियां बचाईं जा सकती हैं।





