बौद्ध सर्किट बनेगा यूपी की आध्यात्मिक राजधानी का आधार

लखनऊ, उत्तर प्रदेश को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को अब बौद्ध सर्किट नई गति देने जा रहा है। सारनाथ से कुशीनगर और श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैला यह आध्यात्मिक गलियारा अब वैश्विक पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।
प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर बढ़ती पर्यटकों की संख्या इस सर्किट की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है। वर्ष 2025 में कौशाम्बी, संकिसा समेत छह प्रमुख स्थलों पर 82 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। इन स्थलों को बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। इसका सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है, जहां होटल, परिवहन, गाइड सेवा और हस्तशिल्प क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कुशीनगर में आयोजित कॉन्क्लेव ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया। इस आयोजन में 2,300 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जबकि थाईलैंड, जापान, म्यांमार, भूटान और नेपाल से आए प्रतिनिधियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया। इस दौरान करीब 3,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो बौद्ध सर्किट की आर्थिक क्षमता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ के तहत पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में प्रदेश की हिस्सेदारी को 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, यूनेस्को मान्यता प्राप्त विरासत स्थलों की संख्या को 7 से बढ़ाकर 20 तक पहुंचाने की योजना है।
भगवान बुद्ध से जुड़ी यह पावन भूमि, जहां उन्होंने प्रथम उपदेश दिया और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया, आज एक नई वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है। राज्य सरकार की नीतियां, अंतरराष्ट्रीय आयोजन और निवेश प्रस्ताव मिलकर उत्तर प्रदेश को आध्यात्मिक और पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।





