भाजपा के ‘डबल इंजन’ पर अखिलेश यादव का करारा हमला, जनता से आत्ममंथन की अपील

लखनऊ, समाजवादी पार्टी (सपा)के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकारों के ‘डबल इंजन’ मॉडल को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग आंख बंद कर भाजपा को समर्थन और वोट दे रहे हैं, यदि उनमें रत्ती भर भी देशप्रेम, संवेदना, मानवता, विवेक और चेतना बची है, तो उन्हें मौजूदा हालात पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है।
रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तराखण्ड में ‘उत्तराखण्ड की बेटी’ को न्याय दिलाने के लिए लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश में ज़हरीले सिरप से लोगों की जान जा रही है। एक तरफ़ सरकार नोटबंदी और जीएसटी के ज़रिए काले धन के ख़ात्मे और ईमानदार टैक्स सिस्टम की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जीएसटी अधिकारियों के घरों से करोड़ों रुपये नक़द निकलना सरकार की कथनी-करनी का बड़ा विरोधाभास है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में ज़हरीले पानी से मौतें हो रही हैं और दलितों पर अत्याचार की सारी हदें पार की जा रही हैं, यहां तक कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें जलाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली में लोग एक-एक सांस के लिए तरस रहे हैं, राजस्थान में किसान घातक फैक्ट्रियों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं, जबकि गुजरात और हरियाणा में अरावली को बचाने के लिए आम जनता को अदालतों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सपा अध्यक्ष ने त्रिपुरा, असम, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार का ज़िक्र करते हुए कहा कि कहीं अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं, कहीं आदिवासियों के जल-जंगल-ज़मीन को बेरहमी से लूटा जा रहा है, तो कहीं लोगों को न चुनाव लड़ने दिया जा रहा है और न ही स्वतंत्र रूप से वोट डालने दिया जा रहा है। बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर और कुछ समझ न आए तो लोग अपने घटते काम-कारोबार, बेरोज़गार युवाओं की हताशा, बढ़ते भ्रष्टाचार, ज़हरीले पर्यावरण, नफ़रती और हिंसक सामाजिक माहौल, महिलाओं और पीडीए समाज के ख़िलाफ़ हो रहे अत्याचारों पर ही गौर कर लें। उन्होंने कहा कि देश की बिगड़ती अंतरराष्ट्रीय छवि, निवेश में हो रही गिरावट और विदेशों में भारतीयों को झेलनी पड़ रही परेशानियों पर भी सोचना ज़रूरी है।
उन्होंने अपील की कि जनता साम्प्रदायिकता का चश्मा उतारकर अपने घर-परिवार और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के बारे में गंभीरता से विचार करे। यही समय है सही सवाल पूछने और सच्चाई को पहचानने का।





