भारत – अमेरिका व्यापार समझौते की मुख्य बातें

नयी दिल्ली, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर जारी संयुक्त वक्तव्य की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

अमेरिका और भारत के बीच 6 फरवरी 2025 को जारी अंतरिम समझौते की रूपरेखाआगे चलकर बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव रखेगा।

– भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क खत्म करेगा या बहुत कम करेगा।

– ऐसे उत्पादों में

◦ ड्राई डिस्टिलर्स ग्रेन

◦ लाल ज्वार (पशु चारा के लिए)

◦ बादाम, अखरोट आदि ड्राई फ्रूट्स

◦ ताजे और प्रोसेस्ड फल

◦ सोयाबीन तेल

◦ वाइन और स्पिरिट्स

• अमेरिका भारतीय सामान (जैसे कपड़ा, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, रासायनिक उत्पाद, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प, कुछ मशीनरी)पर 18% का परस्पर अनुवर्ती शुल्क लगाएगा

• अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक पूरा होने पर कई भारतीय सामानों पर यह शुल्क पूरी तरह हट जाएगा। ऐसे सामानों में

◦ जेनेरिक दवाइयाँ

◦ रत्न और हीरे

◦ विमान के कल पुर्जे

• अमेरिका कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा वाले शुल्कों को हटाएगा जिससे स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर तथा भारतीय विमान और पार्ट्स के कारोबार को फायदा होगा।

• भारत को ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए अमेरिका में विशेष कम शुल्क आधारित कोट का लाभ मिलेगा।

• दवाइयों पर अलग जांच के बाद और लाभ मिल सकता है।

• दोनों देश महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक-दूसरे को प्राथमिकता से बाजार में प्रवेश के अवसर देंगे।

• भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की योजना बना रहा है, जिनमें

◦ ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस)

◦ विमान और पार्ट्स

◦ कीमती धातु

◦ टेक्नोलॉजी उत्पाद (जैसे जीपीयू, डेटा सेंटर सामान)

◦ कोकिंग कोल

• टेक्नोलॉजी उत्पादों का व्यापार बहुत बढ़ेगा।

• दोनों देश व्यापार में आने वाली दूसरी मुश्किलों को दूर करेंगे।

• भारत अमेरिकी मेडिकल डिवाइस, आईटी सामान की आयात लाइसेंसिंग, मानक/टेस्टिंग और खाद्य/कृषि उत्पादों की समस्याएं हल करेगा।

• भारत 6 महीने में तय करेगा कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक स्वीकार कर सकता है या नहीं।

-दोनों पक्ष डिजिटल व्यापार की बाधाएं भी हटाएंगे और भविष्य में मजबूत नियम बनाएंगे।

अन्य महत्वपूर्ण बातें

• वास्तु के मूल स्रोत के नियम बनेंगे ताकि लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले।

• भारत और अमेरिका सप्लाई चेन मजबूत करेंगे, निवेश की जांच, निर्यात नियंत्रण और आर्थिक सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाएंगे।

• अगर शुल्क में बदलाव हुआ तो दोनों में से कोई भी पक्षसमझौते में संशोधन कर सकता है।

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