भारत-जर्मनी के सहयोग से दूरसंचार और डिजिटल परिवर्तन में मिली नयी मजबूती

नयी दिल्ली, भारत और जर्मनी ने दूरसंचार तथा डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में अपने रणनीतिक सहयोग को और सुदृढ़ करने पर सहमति जताई है।

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और जर्मनी के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एवं गवर्नमेंट मॉडर्नाइजेशन मंत्री कार्स्टन वाइल्डबर्गर के बीच बुधवार को यहां संचार भवन में द्विपक्षीय बैठक में गत10 जनवरी को भारत-जर्मनी शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित संयुक्त आशय घोषणा के बाद हुई, जिसके तहत दूरसंचार और डिजिटल प्रशासन में संरचित सहयोग के लिए एक रूपरेखा तय की गई है। दोनों पक्षों ने इसे खुलेपन, भरोसे, नवाचार और मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के साझा मूल्यों का महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।

बैठक में श्री सिंधिया ने भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में आज 1.23 अरब से अधिक दूरसंचार ग्राहक और लगभग एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। उन्होंने बताया कि 5जी सेवाएं देश के करीब 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं और डेटा दरें विश्व में सबसे कम, लगभग 0.10 डॉलर प्रति जीबी के आसपास हैं, जिससे कनेक्टिविटी व्यापक और सुलभ बनी है। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) की सफलता और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे मॉडल के रूप में रेखांकित किया, जो हर वर्ष लगभग 250 अरब लेनदेन संसाधित करता है।

जर्मन मंत्री वाइल्डबर्गर ने भारत की तकनीकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्नत दूरसंचार प्रणालियों, सुरक्षित नेटवर्क और डिजिटल गवर्नेंस में सहयोग बढ़ाने में रुचि जताई। उन्होंने क्वांटम एन्क्रिप्शन और सुरक्षित सूचना परिवहन के क्षेत्र में जर्मनी के अनुभव साझा किए तथा 6जी तकनीक के विकास में भारत के साथ सक्रिय साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों देशों ने जेडीआई के तहत पहली उच्चस्तरीय बैठक जल्द आयोजित कर दो वर्षीय कार्ययोजना तय करने, प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने और प्रमुख संयुक्त परियोजनाएं शुरू करने पर सहमति जताई। साथ ही समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित समीक्षा बैठकें करने का भी निर्णय लिया गया।

भारत और जर्मनी ने 5जी/5जी-एडवांस्ड, 6जी मानकीकरण, नेटवर्क आधुनिकीकरण, भरोसेमंद दूरसंचार ढांचा, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ता, एज-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नेटवर्क स्लाइसिंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) सहित वैश्विक मंचों पर समन्वित भागीदारी भी बढ़ाने पर सहमति बनी।

बैठक में अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को साझेदारी का प्रमुख आधार बताया गया। सी-डॉट और जर्मनी के फ्राउनहोफर हेनरिक-हर्ट्ज इंस्टीट्यूट के बीच चल रहे उन्नत दूरसंचार अनुसंधान, क्वांटम संचार और एआई आधारित तकनीकों में सहयोग को मॉडल के रूप में रेखांकित किया गया।

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