भीड़ से निपटने को ग्रामीण बैंकों ने अपनाया नया फार्मूला

Building and sign bank (done in 3d)

मेरठ,  नोटबंदी के बाद से ही बैंकों में मारामारी के हालात है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में एक-एक सप्ताह में कैश आने से लोग बुरी तरह परेशान है और आए दिन बैंकों में हंगामे, तोड़फोड़ हो रही है। इससे निजात पाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों ने सप्ताह में अलग-अलग गांव को पैसा देने का फार्मूला अपनाया है।

500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में नए नोट उपलब्ध नहीं हो पा रहे। शहर से लेकर गांवों तक में मारामारी मची हुई है। गांवों में कई-कई दिन बैंकों में पैसा नहीं आने के कारण अव्यवस्था फैल रही है। कई गांवों में तो सप्ताह में एक ही दिन पैसा आ रहा है। इससे वहां आए दिन हंगामे, बवाल, तोड़फोड़ हो रही है। कई बार तो गुस्साए ग्रामीण बैंक कर्मचारियों को ही वापस लौटा देते हैं।

आरबीआई से पर्याप्त पैसा नहीं आने के कारण बैंकों ने नया फार्मूला निकाला है। एक बैंक से जुड़े हैं कई-कई गांव-गांवों में स्थित बैंकों की एक-एक शाखा से कई-कई गांव जुड़े होते हैं। इतने गांवों के लोगों के एक ही दिन पैसा निकालने पहुंचने से वहां अव्यवस्था फैल जाती है। इसकी काट खोजते हुए बैंक प्रबंधकों ने प्रत्येक गांव का सप्ताह में एक दिन पैसा देने के लिए नियत कर दिया है। सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग-अलग गांवों के लोगों को पैसा बांटा जाने लगा है। इससे बैंकों में भीड़ से राहत मिलने के साथ ही लोगों को भी ठीक मात्रा में पैसा मिलने लगा है। मेरठ के एलडीएम अविनाश तांती का कहना है कि ग्रामीण ब्रांचों को कम पैसा मिल रहा है। इस कारण दिक्कत आ रही हैं। बैंक प्रबंधकों ने अपने स्तर पर इस तरह की व्यवस्था की होगी।

Related Articles

Back to top button