माघ मेला का निर्विघ्न आयोजन सरकार की प्राथमिकता: उपमुख्यमंत्री मौर्य

प्रयागराज,  उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को प्रयागराज माघ मेला 2026 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होने कहा कि 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद लगातार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित किया जा रहा है। सपा सरकार में माघ मेला के लिए सिर्फ 30 करोड़ का बजट मिलता था। लेकिन भाजपा सरकार ने बजट बढ़ाकर 90 करोड़ रुपए कर दिया है। उन्होने कहा, “ हमारी प्राथमिकता है कि माघ मेले को सुचारू ढंग से संपन्न कराया जाए।”

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि साधु संतों, श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की व्यवस्था में कोई कमी ना रहे। मेले में जितनी संस्थाएं लगती थी उनकी सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इस बार बाढ़ अधिक समय तक थी इसलिए मेले को बसाने में जमीन की समस्या आ रही है। लेकिन सभी संप्रदाय के साधु संतों से बातचीत की गई है और उनकी समस्याओं का भी समाधान मेला प्रशासन की ओर से किया जा रहा है।

उन्होने कहा है कि माघ मेले के दौरान गंगाजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। इस मौके पर उन्होने प्रयागराज के अरैल से श्रृंगवेरपुर तक दोनों तरफ स्थित विद्युत शवदाह गृहों के संचालन की जांच के भी निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होने कहा कि कुंभ मेला 2025 स्वच्छता के लिए समर्पित था। इस माघ मेले में भी स्वच्छता और पर्यावरण की अनुकूलता पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा है कि माघ मेले का आयोजन पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व 3 जनवरी से 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक किया जाएगा। डिप्टी सीएम के मुताबिक इस बार 8 हेक्टेयर में 7 सेक्टर में मेला बसाया जा रहा है। जिसमें एक लाख 20हजार वाहनों की क्षमता के 42 अस्थाई पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं। मेले में स्वच्छता के लिए 25 हजार शौचालय 8 हजार डस्टबिन भी रखे जा रहे हैं। माघ मेले में साढे़ तीन हजार से ज्यादा स्वच्छता कर्मियों की तैनाती की जा रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के मानक पर भी माघ मेला पूरा तरह से खरा उतरेगा। माघ मेले में 17 थाने, 42 चौकियां और 20 फायर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। जो कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं, साधु संतों और कल्पवासियों की मदद करते नजर आएंगे। प्रदेश सरकार माघ मेले के आयोजन में किसी तरह की कमी नहीं होने देगी।

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