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चुनाव से ऐन पहले सपा परिवार में हुई टूट के बाद यह परिवार अलग-थलग पड़ गया था। इसके बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन में सहारनपुर में काजी रशीद मसूद को तवज्जों नहीं मिली। जबकि उनके विरोधी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और उनके भतीजे इमरान मसूद ने सहारनपुर के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि वे खुद चुनाव हार गए, मगर गठबंधन के खाते में तीन सीटें आ गई।सपा ने काजी रशीद मसूद के बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़वाया था। मगर उन्हें मनचाही तवज्जों नहीं मिली। वर्ष 2012 से पहले वह समाजवादी पार्टी में बेहद मजबूत नेता के रूप में थे। विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे की नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ लिया था और राज्यसभा सांसद के साथ ही एपिडा चेयरमैन बनाया। इसी बीच एमबीबीएस सीट घोटाले में काजी रशीद मसूद आरोपी हो गए और पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया। इससे पहले उनके भतीजे इमरान मसूद ने भी उनका साथ छोड़ दिया था।