राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल : आईआईएम

लखनऊ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर विकसित ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ को भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) की ताजा केस स्टडी में मजबूती मिली है। “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” शीर्षक से जारी अध्ययन में कहा गया है कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है।

अध्ययन के अनुसार मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या मुख्यतः एक पारंपरिक तीर्थस्थल तक सीमित थी, जहां आगंतुकों की संख्या और स्थानीय बाजार की आय सीमित थी। होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति नगण्य थी और बुनियादी ढांचा भी सीमित था। रोजगार के अवसर कम होने के कारण युवाओं का पलायन सामान्य था। पर्यटन से होने वाला राजस्व भी राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान नहीं दे पा रहा था।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। अब वार्षिक स्तर पर 5-6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है। अयोध्या में लगभग 85 हजार करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण शामिल हैं। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

अध्ययन के मुताबिक कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के आकलन के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा से देश भर में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापारिक कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य क्षेत्र को नई गति मिली है और 150 से अधिक होटल व होमस्टे स्थापित हुए हैं। ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स जैसी श्रृंखलाओं ने भी विस्तार योजनाएं आगे बढ़ाई हैं।

आईआईएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि अयोध्या में लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए हैं तथा अगले 4-5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में करीब 1.2 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान है। छोटे दुकानदारों की दैनिक आय 2,500 रुपये तक पहुंचने और रियल एस्टेट मूल्यों में उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि सुविचारित नीति और अवसंरचना निवेश के साथ धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने में प्रभावी उत्प्रेरक सिद्ध हो सकता है।

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