विधानसभा में उठा आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण और किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस का मुद्दा

लखनऊ, उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण और किशोरों को ड्राइविंग लाइसेंस दिए जाने का मामला सदन में उठाया गया। सरकार ने दोनों ही मामले में सदन में जवाब दिया।
समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक संग्राम यादव ने आजमगढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े 100 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने का मामला उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है और उन्हें सेवा सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही।
जवाब में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वर्तमान नीति के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक पृथक निगम का गठन किया गया है, जिससे वेतन भुगतान और सेवा शर्तों में मनमानी की शिकायतों को रोका जा सके। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कंपनियों के माध्यम से वेतन वितरण में पारदर्शिता की कमी है तथा ईपीएफ की कटौती के बावजूद कई मामलों में राशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही।
सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह वर्ष के किशोरों को 50 सीसी तक के वाहन चलाने हेतु लाइसेंस देने के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि इस विषय में केंद्र सरकार से अनुमति का अनुरोध किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कुछ इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में उपलब्ध हैं और केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।





