श्रीराम मंदिर ध्वजारोहण: सांस्कृतिक निरंतरता, रामराज्य के आदर्शों की वाहक है धर्मध्वजा

अयोध्या, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के ऊपर फहरायी गई पवित्र ध्वजा गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता का संदेश देती है तथा रामराज्य के आदर्शों का प्रतीक मानी जाती है। यह धर्म ध्वजा पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित मंदिर के शिखर पर फहराई गयी है।
धर्म ध्वजा समकोण त्रिभुजाकार है। इसकी ऊंचाई 11 फुट और लंबाई 22 फुट है। ध्वज पर उकेरा गया दीप्तिमान सूर्य का चिह़न भगवान राम के तेज और शौर्य का प्रतीक माना जाता है। इस पर ‘ॐ’ और रघुकुल राज के प्रतीक चिह्न ‘कोविदार वृक्ष’ की आकृतियां भी अंकित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पवित्र भगवा ध्वज, राम राज्य के आदर्शों को प्रतिबिंबित करते हुए, गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरंतरता के संदेश के वाहक है।
ध्वज का निर्माण अहमदाबाद के पैराशूट विशेषज्ञ भरत भाई मेवाड़ा ने रेशमी और कृत्रिम धागों से किया है जो 161 फुट ऊँचे मंदिर के शिखर पर 42 फुट ऊँचे ध्वजदंड पर लहरा रहा है। इसे हवाओं के वेग और हर मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।
ध्वज तैयार करने वाले श्री मेवाड़ा का कहना है, ‘राममंदिर में लगा यह ध्वज वैदिक विधान के अनुरूप बना है। मंदिर के शिखर के अनुपात में ध्वज बनाया जाता है।’
प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वज के प्रतिष्ठापन के अवसर पर रामचरित मानस में इस ध्वज के आख्यान का उल्लेख करते हुए इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म ध्वजा को लेकर सोसल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा ,’श्री अयोध्या धाम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के भव्य मंदिर पर ध्वजारोहण एक यज्ञ की पूर्णाहुति नहीं, बल्कि एक नए युग का शुभारंभ है।’





