हांगकांग से आए 350 जैन श्रद्धालुओं ने किया संगम व अक्षयवट दर्शन

प्रयागराज, संगम नगरी प्रयागराज की पावन धरती पर मंगलवार को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। हांगकांग (चीन) से आए लगभग 350 जैन श्रद्धालुओं का एक जत्था अक्षयवट स्थित प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) की तपोस्थली और प्राचीन चरण पादुका के दर्शन के लिए यहां पहुंचा।

श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान-पूजन कर आध्यात्मिक शांति की अनुभूति साझा की। उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ की चरण पादुका और तपोस्थली के दर्शन उनके जीवन का दुर्लभ सौभाग्य है। अक्षयवट की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता ने उनकी तीर्थयात्रा को अविस्मरणीय बना दिया।

इस अवसर पर प्रयागराज के महापौर गणेश केसरवानी ने विदेशी मेहमानों का पारंपरिक ढंग से स्वागत करते हुए ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को चरितार्थ किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज सदियों से विविध आस्थाओं और संस्कृतियों का संगम रहा है। हांगकांग से आए जैन श्रद्धालुओं का आगमन इस बात का प्रमाण है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत आज भी विश्व को शांति, संयम और नैतिक मूल्यों का संदेश दे रही है।

महापौर ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया कि नगर निगम और स्थानीय प्रशासन उनकी सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर आचार्य मोहित पांडेय, पार्षद मुकेश कसेरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों—अहिंसा और सह-अस्तित्व—के वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला।

श्रद्धालुओं ने स्थानीय प्रशासन और नगरवासियों द्वारा मिले आत्मीय सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस यात्रा को ‘आस्था की अविरल धारा’ बताया।

Related Articles

Back to top button