हेट स्पीच पर अतिरिक्त दिशा-निर्देशों की आवश्यकता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने देश भर में नफरती भाषण (हेट स्पीच) पर अंकुश लगाने के लिए कोई भी नया दिशा-निर्देश जारी करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की मांग करने वाली याचिकाओं के एक बैच को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि हेट स्पीच की समस्या से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है। मौजूदा कानूनी ढांचे में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त तंत्र है।
न्यायालय ने कहा कि असली चिंता कानून का अभाव नहीं, बल्कि उसे लागू करने को लेकर है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत वैधानिक योजना आपराधिक कानून को गति में लाने के लिए एक व्यापक प्रक्रिया प्रदान करती है।
पीठ ने कहा कि इसका उपचार कई स्तरों पर उपलब्ध हैं। अगर पुलिस उच्चतम न्यायालय के 12 नवंबर, 2013 के ‘ललिता कुमारी’ फैसले के अनुसार प्राथमिकी दर्ज करने में नाकाम रहती है, तो पीड़ित व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकता है और उसके बाद मजिस्ट्रेट के पास गुहार लगा सकता है।
न्यायालय ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 156(3), जो अब बीएनएसएस की धारा 175(3) हो गयी है, उसके तहत मजिस्ट्रेट का पर्यवेक्षी अधिकार क्षेत्र काफी व्यापक है और उचित जांच सुनिश्चित करने के लिए इसका उपयोग हो सकता है। पीठ ने इस बात को दोहराया कि समस्या कानूनी प्रावधानों की कमी से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन से पैदा होती है। आपराधिक अपराधों का निर्धारण करना विधायिका का काम है और अदालतें
संसद या राज्य विधानसभाओं को नए कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकतीं। वे ज्यादा से ज्यादा सुधार की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन कानून बनाने का फैसला निर्वाचित निकायों का ही होता है। साथ ही, न्यायालय ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए टिप्पणी की, “हम यह कहना उचित समझते हैं कि हेट स्पीच और अफवाह फैलाने से संबंधित मुद्दे सीधे तौर पर बंधुत्व, गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था के संरक्षण को प्रभावित करते हैं।
यह फैसला याचिकाओं के एक समूह पर आया है। इसमें 2022 में न्यायालय से जारी पिछले निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिकाएं भी शामिल थीं। उस समय, न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे औपचारिक शिकायतों का इंतजार किये बिना, स्वतः संज्ञान लेते हुए हेट स्पीच के खिलाफ मामले दर्ज करें।





