देश की राजधानी में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का भव्य उद्घाटन

नई दिल्ली,नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में संतों, विचारकों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में राष्ट्र, संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत एवं ‘सनातन संस्था’ द्वारा आयोजित भव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का शुभारंभ उत्साह और राष्ट्रभावना के वातावरण में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में संस्कृति, राष्ट्रसुरक्षा और सामाजिक जागरण जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।
साहस और संकल्प की आवश्यकता
दिल्ली के सांस्कृतिक कार्यमंत्री श्री कपिल मिश्रा ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए समाज को जागरूक और सक्रिय रहना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश को भय नहीं, बल्कि साहस और संकल्प की आवश्यकता है।
वरिष्ठ संतों एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
उद्घाटन अवसर पर पूज्य प.पू. शांतिगिरी महाराज, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन कर महोत्सव का शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर श्री उदय माहूरकर, श्री सुरेश चव्हाणके, सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे एवं श्री अभय वर्तक भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष – सामूहिक गायन से राष्ट्रभावना का जागरण
‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सभी उपस्थितों ने सामूहिक रूप से इसका गायन किया। कार्यक्रम के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।
धर्म, संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था पर विचार-मंथन
श्री उदय माहूरकर ने सामाजिक और डिजिटल माध्यमों में बढ़ती अश्लीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए ‘विकृति सामग्री मुक्त भारत’ का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा में अनुशासन और मूल्य आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।
समाज की भी समान भागीदारी आवश्यक
सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री अभय वर्तक ने कहा कि राष्ट्रसुरक्षा केवल शासन या सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी समान भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जन-जागरण और सतर्कता को महत्वपूर्ण बताया।
धार्मिक ग्रंथों एवं पुस्तकों का लोकार्पण
इस अवसर पर सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित हिंदी पुस्तक ‘संकल्प रामराज्य का’ तथा वेदवीर आर्य लिखित अंग्रेज़ी ग्रंथ ‘Chronology and Origins of Indo-European Civilization’ का भी लोकार्पण किया गया।





